FIIs की फ्यूचर में बंपर खरीदारी, मार्केट में आया नया जोश
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी इंडेक्स फ्यूचर्स में अपनी शॉर्ट पोजीशन (short positions) कम की हैं और लॉन्ग पोजीशन (long positions) में भारी बढ़ोतरी की है। यह भारतीय शेयरों के प्रति बढ़ते भरोसे का संकेत है। FIIs ने इंडेक्स फ्यूचर्स में 80,000 कॉन्ट्रैक्ट्स से ज्यादा की लॉन्ग पोजीशन ली हैं, जो मई 2025 के बाद पहली बार हुआ है। इस खरीदारी ने कई इंडेक्स को उनके 20-दिन मूविंग एवरेज (moving average) से ऊपर ले जाने में मदद की है।
FIIs के दांव से बढ़ी मार्केट में उम्मीदें
FIIs के डेरिवेटिव पोजिशंस में आए इस बड़े बदलाव से मार्केट में सकारात्मकता बढ़ी है। पिछले हफ्ते के मुकाबले लॉन्ग कॉन्ट्रैक्ट्स में लगभग 20% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि शॉर्ट पोजीशन 14.4% घटी हैं। इससे लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो (long-short ratio) बढ़कर 22 हो गया है। यह बताता है कि निवेशक शॉर्ट कवरिंग (short covering) से आने वाली तेजी को लेकर काफी आश्वस्त हैं। हालांकि, शॉर्ट पोजीशन अभी भी फरवरी के निचले स्तर से ऊपर हैं, फिर भी यह ट्रेंड पॉजिटिव माना जा रहा है।
सेक्टर की मजबूती: ऑटो और FMCG सबसे आगे
ऑटो सेक्टर में दिखा दम
Nifty Auto इंडेक्स कई टाइमफ्रेम पर मजबूत बुलिश संकेत दे रहा है। इसका RSI (Relative Strength Index) 60 के करीब है, जो तेजी का संकेत देता है। ऑटो स्टॉक फ्यूचर्स में भी लॉन्ग पोजीशन बढ़ रही हैं और शॉर्ट कवरिंग देखी जा रही है। इस सेक्टर को 6.5-7% की अनुमानित GDP ग्रोथ, गिरती ब्याज दरें और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च जैसे मजबूत आर्थिक कारक सहारा दे रहे हैं। कमर्शियल व्हीकल की बिक्री भी बेहतर फ्रेट डिमांड के कारण बढ़ी है। एनालिस्ट्स M&M, Maruti Suzuki, TVS Motor Company, Eicher Motors और Bajaj Auto जैसी कंपनियों में अच्छी तेजी की उम्मीद कर रहे हैं। वैल्यूएशन की बात करें तो M&M का P/E 22.4x है, जबकि Eicher Motors का 43.9x है। हालांकि, यह सेक्टर अब 3-6% की मॉडरेट ग्रोथ फेज में प्रवेश कर रहा है।
FMCG सेक्टर की मजबूती, बढ़ी कीमतें भी नहीं रोक सकीं
Nifty FMCG इंडेक्स में भी ट्रेंड रिवर्सल (trend reversal) के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। MACD हिस्टोग्राम (MACD histogram) कमजोर बियरिश मोमेंटम (bearish momentum) का इशारा कर रहा है। FMCG स्टॉक फ्यूचर्स में भी लॉन्ग पोजीशन बढ़ रही हैं। यह सेक्टर कुछ चुनौतियों के बावजूद लचीला बना हुआ है, जैसे Nestle India के मार्जिन पर कोको की बढ़ती कीमतें और शहरी महंगाई का असर। Hindustan Unilever, ITC, और Nestle India जैसी कंपनियों में रिवर्सल पैटर्न दिख रहे हैं, जो संभावित तेजी का संकेत देते हैं। FMCG सेक्टर के वैल्यूएशन काफी ऊंचे हैं, Nestle India का P/E लगभग 72.6x, Britannia Industries का 55.1x और Hindustan Unilever का 49.9x है। एनालिस्ट्स ने Britannia Industries को 6,700 INR के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग दी है, और Nestle India को 2,500-2,800 INR के 12-महीने के टारगेट के साथ 'Strong Buy' कहा है।
मुख्य जोखिम और चुनौतियाँ
सकारात्मक सेंटीमेंट के बावजूद, कुछ बड़े जोखिम बने हुए हैं। FIIs द्वारा चलाई जा रही यह तेजी लगातार पूंजी प्रवाह पर निर्भर करती है, जो अप्रत्याशित हो सकता है। ऑटो और FMCG दोनों सेक्टर्स में वैल्यूएशन बहुत ऊंचे हैं, खासकर FMCG में। Nestle India जैसे स्टॉक का ~72x P/E बताता है कि उम्मीदें पहले से ही कीमत में शामिल हैं। ऑटो सेक्टर में इनपुट लागत, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव बढ़ने पर खरीद में देरी जैसी चुनौतियाँ आ सकती हैं।
सेक्टर का आउटलुक
आगे चलकर, Nifty Auto इंडेक्स 27,940 के लक्ष्य तक जा सकता है, और यदि सपोर्ट लेवल बना रहता है तो 28,800 तक भी जा सकता है। Nifty FMCG इंडेक्स 50,500-50,800 के जोन की ओर बढ़ सकता है। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री से FY2026-27 में 3-6% की मॉडरेट वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीद है। FMCG सेक्टर अपनी डिफेंसिव अपील बनाए रखेगा, लेकिन इसकी ग्रोथ लागत प्रबंधन और ब्रांड की ताकत को वॉल्यूम में बदलने पर निर्भर करेगी।