Exide Industries अपने बेंगलुरु स्थित लिथियम-आयन सेल प्लांट से इस फाइनेंशियल ईयर की तीसरी तिमाही (Q3) तक रेवेन्यू (Revenue) जेनरेट करने की उम्मीद कर रही है। कंपनी अब तक **₹4,800 करोड़** का भारी निवेश कर चुकी है और पहले फेज को पूरा करने के लिए **₹1,400 करोड़** और लगाने की तैयारी में है। यह कदम इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट के लिए इंपोर्टेड सेल्स पर निर्भरता कम करने की दिशा में कंपनी के लिए बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
पारंपरिक बिजनेस से भविष्य की ओर Exide Industries
Exide Industries अपने पुराने लीड-एसिड बैटरी बिजनेस से निकलकर भविष्य की टेक्नोलॉजी की ओर कदम बढ़ा रही है। कंपनी का बेंगलुरु में लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट तैयार है और कंपनी ने कन्फर्म किया है कि यह प्लांट चालू फाइनेंशियल ईयर की तीसरी तिमाही (Q3) तक रेवेन्यू देना शुरू कर देगा। यह बदलाव Exide के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए लिथियम-आयन बैटरियों का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।
निवेश और क्षमता का पूरा प्लान
एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) टेक्नोलॉजी पर फोकस वाले इस प्रोजेक्ट में अब तक करीब ₹4,800 करोड़ का इन्वेस्टमेंट हो चुका है। कंपनी ने इस फाइनेंशियल ईयर में पहले फेज को पूरा करने के लिए ₹1,400 करोड़ का अतिरिक्त फंड भी तय किया है। इस प्लांट में लिथियम आयरन फॉस्फेट (Lithium Iron Phosphate) और निकेल मैंगनीज कोबाल्ट (Nickel Manganese Cobalt) जैसी बैटरी केमिस्ट्री तैयार की जाएंगी। पहले फेज की कुल 6 GWh कैपेसिटी में से, Exide इसी फाइनेंशियल ईयर में 3 GWh का इस्तेमाल करने की उम्मीद कर रही है। शुरुआत में, कंपनी अपनी गुजरात स्थित बैटरी पैक असेंबली प्लांट को सेल्स सप्लाई करेगी, जिसका फोकस पहले थ्री-व्हीलर सेगमेंट पर रहेगा, और बाद में टू-व्हीलर्स और अन्य ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) एप्लीकेशन्स में विस्तार किया जाएगा।
घरेलू मार्केट की जरूरतें
भारत में 2030 तक लिथियम-आयन सेल्स की घरेलू मांग बढ़कर 130 GWh तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि फिलहाल लगभग 20 GWh के आसपास है। फिलहाल, इस जरूरत को पूरा करने के लिए भारत काफी हद तक इंपोर्टेड सेल्स पर निर्भर है। Exide पहले से ही विभिन्न निर्माताओं को सैंपल सप्लाई कर रही है ताकि जरूरी वैलिडेशन (Validation) और सर्टिफिकेशन (Certification) प्रोसेस पूरा किया जा सके, जो कि बड़े पैमाने पर कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने से पहले एक अहम शर्त है। कंपनी इस नए ग्रोथ एरिया पर फोकस कर रही है, लेकिन उसने यह भी साफ किया है कि वह अपने मौजूदा लीड-एसिड बैटरी बिजनेस को सपोर्ट करना जारी रखेगी, जो अभी भी उसके ऑपरेशन का एक मुख्य हिस्सा है।
कंपनी की रणनीति और भविष्य
सरकार ने बैटरी सेल प्रोडक्शन के लिए जरूरी मशीनरी पर इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) माफ करके इस सेक्टर में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया है, जिससे Exide जैसी कंपनियों को फायदा हो रहा है। हालिया फाइनेंशियल रिपोर्ट्स में, Exide ने चौथे क्वार्टर में इनपुट कॉस्ट में बदलाव के कारण 5-6% की प्राइस करेक्शन (Price Correction) दर्ज की थी। निवेशक कंपनी की इस नई टेक्नोलॉजी में सफलतापूर्वक ट्रांजिशन (Transition) करने की क्षमता पर नजर रखेंगे, क्योंकि प्रॉफिटेबिलिटी काफी हद तक कमर्शियल स्केल प्रोडक्शन को तेजी से हासिल करने और इस बड़े कैपिटल प्रोजेक्ट की लागतों को मैनेज करने पर निर्भर करेगी। बेंगलुरु प्लांट के कमीशनिंग टाइमलाइन (Commissioning Timeline) और OEM सर्टिफिकेशन प्रोसेस की सफलता पर भविष्य में अपडेट मिलने की उम्मीद है।
