यूरोप में चीनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच Ferrari, Maserati और Ducati ने भारत में अपना कारोबार बढ़ाने का फैसला किया है। इस विस्तार की सफलता भारत-EU ट्रेड एग्रीमेंट पर टिकी है।
यूरोप के लग्जरी ऑटो ब्रांड्स Ferrari, Maserati और Ducati अब भारत में अपने पंख फैला रहे हैं। यह कदम उनके घरेलू बाजार में बढ़ते दबाव का नतीजा है, जहां चीनी कंपनियां एडवांस टेक्नोलॉजी और किफायती कीमतों के साथ बाजार पर कब्जा कर रही हैं। भारत का बाजार इन कंपनियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन रहा है, जहां उन्हें कम कीमत वाले प्रतिद्वंद्वियों से उतनी कड़ी टक्कर नहीं मिल रही है।
इंडिया-EU ट्रेड एग्रीमेंट की अहमियत
इस विस्तार के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर 'इंडिया-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' है, जिसके 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक होने की उम्मीद है। अभी भारत में विदेशी लग्जरी गाड़ियां मंगाना काफी महंगा है क्योंकि इम्पोर्ट ड्यूटी 100% से ज्यादा है। जानकारों का मानना है कि ट्रेड डील होने पर यह ड्यूटी घटकर 30% से 35% तक आ सकती है, जिससे ये प्रीमियम गाड़ियां आम खरीदारों के लिए ज्यादा सुलभ होंगी और सेल्स वॉल्यूम में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
बदल रहा है बाजार का समीकरण
भारतीय लग्जरी कार बाजार में मुकाबला बढ़ रहा है। Mercedes-Benz ने 2026 की तीसरी तिमाही में 5,400 से ज्यादा यूनिट्स बेचकर अपनी बादशाहत बरकरार रखी है, लेकिन अब खतरा सिर पर है। BYD का लग्जरी ब्रांड Denza, 13 नवंबर 2026 को भारत में अपने D9 MPV और Z9 GT के साथ एंट्री करने वाला है। यानी अब यूरोपीय कंपनियों को भारत में भी कड़ा संघर्ष करना होगा।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह राह आसान नहीं है। 2026 में भारत में लग्जरी कार सेगमेंट की ग्रोथ रफ्तार धीमी हुई है और ग्रोथ रेट सिंगल डिजिट में सिमट गई है। कंपनी का पूरा मॉडल ट्रेड एग्रीमेंट पर निर्भर है। अगर इस समझौते में देरी होती है या शर्तें अनुकूल नहीं रहतीं, तो गाड़ियों की कीमतों में वह कमी नहीं आएगी जिसकी उम्मीद की जा रही है। साथ ही, EV ट्रांजिशन की बढ़ती लागत कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
