इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बनाने वाली कंपनी Euler Motors ने अपने पालघर प्लांट में ₹100 करोड़ का निवेश कर एक नई मैन्युफैक्चरिंग लाइन शुरू की है। इससे कंपनी की सालाना प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़कर 24,000 इलेक्ट्रिक ट्रक हो जाएगी। Hero MotoCorp जैसी बड़ी कंपनी का सपोर्ट मिलने के बावजूद Euler Motors अभी भी घाटे में चल रही है, हालांकि FY26 में इसका रेवेन्यू ₹402 करोड़ रहा।
प्रोडक्शन मेंbig बूस्ट
Euler Motors इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने हरियाणा के पालघर प्लांट में ₹100 करोड़ की लागत से एक नई मैन्युफैक्चरिंग लाइन स्थापित की है। इस विस्तार के साथ, कंपनी अब सालाना 24,000 इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल बना सकेगी। यह नई लाइन कंपनी के इलेक्ट्रिक ट्रक मॉडल्स, जिनमें Turbo EV 1000 और एडवांस्ड ड्राइवर-असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) वाला Storm EV शामिल है, के प्रोडक्शन को सपोर्ट करेगी।
प्राइवेट कंपनी का स्टेटस और फाइनेंशियल्स
इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल स्पेस पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि Euler Motors एक प्राइवेट, अनलिस्टेड कंपनी है। इसका मतलब है कि इसके शेयर NSE या BSE पर ट्रेड नहीं करते। कंपनी के FY26 के फाइनेंशियल्स के अनुसार, इसका रेवेन्यू ₹402 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 110% की जबरदस्त बढ़ोतरी दिखाता है। हालांकि, कंपनी ने करीब ₹308-315 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है। EV स्टार्टअप्स के लिए इस तरह का लॉस आम है, जो फिलहाल आक्रामक मैन्युफैक्चरिंग विस्तार और R&D पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, बजाय तुरंत प्रॉफिट कमाने के।
Hero MotoCorp का सपोर्ट और कंपनी का फोकस
इस विस्तार को स्ट्रैटेजिक निवेशक Hero MotoCorp का लगातार सपोर्ट मिल रहा है। Euler Motors इलेक्ट्रिक कार्गो व्हीकल्स की बढ़ती मांग को पूरा करना चाहती है और पारंपरिक डीजल/पेट्रोल ट्रकों को रिप्लेस करने का लक्ष्य रखती है। कंपनी बैटरी पैक और चेसिस जैसे जरूरी कंपोनेंट्स के इन-हाउस प्रोडक्शन पर जोर दे रही है, ताकि प्रोडक्ट क्वालिटी और सप्लाई चेन पर बेहतर कंट्रोल रखा जा सके।
जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें
प्रोडक्शन कैपेसिटी में यह बढ़ोतरी कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसे अभी भी स्टार्टअप से जुड़े जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें हाई कैश बर्न, लगातार एक्सटर्नल फंडिंग पर निर्भरता और लिथियम, कॉपर व एल्युमिनियम जैसे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर शामिल है। इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में कॉम्पिटिशन भी काफी टफ है। EV सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को यह मॉनिटर करना चाहिए कि कंपनी अपनी नई क्षमता का कितनी जल्दी उपयोग कर पाती है और आने वाले समय में क्या वह प्रॉफिटेबिलिटी की ओर बढ़ पाती है।
