चालू फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती पांच महीनों में एंट्री-लेवल कारों की बिक्री **27%** बढ़कर **5.9 लाख** यूनिट्स पर पहुंच गई है। टैक्स में बदलाव के बाद पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या में इजाफा हुआ है, हालांकि निवेशकों को अब ऑटो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर नजर रखनी होगी।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बार फिर रौनक लौटती दिख रही है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के मुताबिक, इस फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती पांच महीनों में छोटी कारों की बिक्री 27% बढ़कर 5.9 लाख यूनिट्स हो गई है। यह उन कंपनियों के लिए बड़ी राहत है जिन्होंने फाइनेंशियल ईयर 23 में 16.4 लाख यूनिट्स के मुकाबले फाइनेंशियल ईयर 25 के अंत तक 12.8 लाख यूनिट्स की गिरावट देखी थी।
GST का जादू
इस मांग के पीछे सबसे बड़ी वजह GST ढांचे में किया गया बदलाव है। बजट-फ्रेंडली गाड़ियों पर टैक्स का बोझ कम होने से आम आदमी के लिए कार खरीदना आसान हो गया है। डेटा के अनुसार, जिन एंट्री-लेवल गाड़ियों पर अब 18% का निचला टैक्स स्लैब लागू है, उनमें लगभग 30% की ग्रोथ देखी जा रही है, जो 40% टैक्स वाली प्रीमियम गाड़ियों के मुकाबले कहीं ज्यादा है।
ऑटो कंपनियों के सामने चुनौती और अवसर
Maruti Suzuki और Hyundai जैसी दिग्गजों के लिए यह ट्रेंड एक साथ चुनौती और मौका दोनों लेकर आया है। Maruti Suzuki के आंकड़ों के अनुसार, उनके 54% ग्राहक ऐसे हैं जो पहली बार गाड़ी खरीद रहे हैं और वे सीधे टू-व्हीलर से फोर-व्हीलर की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। हालांकि, निवेशकों के लिए चिंता का विषय 'प्रोडक्ट मिक्स' है। आम तौर पर, हैचबैक कारों का प्रॉफिट मार्जिन उन यूटिलिटी व्हीकल्स (UVs) के मुकाबले कम होता है, जिन पर कंपनियां पिछले कुछ सालों से भारी फोकस कर रही थीं।
अब कंपनियों को अपनी प्रोडक्शन लाइन और सप्लाई चेन को मैनेज करना होगा ताकि वे बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखें और प्रॉफिटेबिलिटी पर भी असर न पड़ने दें।
सेक्टर के लिए रिस्क और आने वाला समय
बाजार में मांग तो लौट आई है, लेकिन स्टील और प्लास्टिक जैसी रॉ मटेरियल की बढ़ती कीमतें चिंता का सबब बनी हुई हैं। अगर इनपुट्स महंगे होते हैं, तो कंपनियों को या तो लागत बढ़ानी पड़ेगी या फिर मुनाफे से समझौता करना पड़ेगा। अब निवेशकों की नजर कंपनियों के आने वाले तिमाही नतीजों पर रहेगी कि कैसे ये कंपनियां वॉल्यूम ग्रोथ और मार्जिन के बीच बैलेंस बिठाती हैं।
