इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर का जलवा! जुलाई में 84% की बम्पर बिक्री, कुल मार्केट में 48% हिस्सेदारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर का जलवा! जुलाई में 84% की बम्पर बिक्री, कुल मार्केट में 48% हिस्सेदारी

जुलाई महीने में इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर की बिक्री 42,065 यूनिट्स तक पहुंच गई, जिसने कुल मार्केट का लगभग आधा हिस्सा कब्ज़ा लिया है। ऐसे में देखना होगा कि क्या यह रफ्तार जारी रहती है, क्योंकि कमर्शियल ऑपरेटर्स अब सस्ते इलेक्ट्रिक मॉडल्स की ओर बढ़ रहे हैं।

इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर ने मचाया धमाल!

भारतीय 3-व्हीलर मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) कुल मार्केट का लगभग 50% हिस्सा हासिल करने के करीब पहुंच गए हैं। VAHAN रजिस्ट्रेशन डेटा के अनुसार, जुलाई में इस सेगमेंट की कुल रिटेल बिक्री 86,580 यूनिट्स रही, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 26.4% ज्यादा है। वहीं, पेट्रोल, डीजल या सीएनजी पर चलने वाले पारंपरिक 3-व्हीलर की बिक्री 2.6% घटकर 44,515 यूनिट्स पर आ गई, जबकि इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर की बिक्री में 84.3% का जबरदस्त उछाल आया और यह 42,065 यूनिट्स तक पहुंच गई।

3-व्हीलर मार्केट में कॉम्पिटिशन

कुल 3-व्हीलर मार्केट में Bajaj Auto 41,998 यूनिट्स की कुल रजिस्ट्री के साथ अपनी लीड बनाए हुए है। यह कंपनी इलेक्ट्रिक और इंटरनल कम्बस्चन इंजन (ICE) दोनों कैटेगरी में अपनी मजबूत पकड़ का फायदा उठा रही है। Mahindra Last Mile Mobility 13,455 यूनिट्स के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि Piaggio Vehicles 9,134 यूनिट्स के साथ तीसरे नंबर पर है। TVS Motor और Atul Auto भी टॉप 5 प्लेयर्स में शामिल हैं। यह दिखाता है कि पुरानी कंपनियां अपने पारंपरिक मॉडल्स के साथ-साथ इलेक्ट्रिक ऑप्शंस को भी सफलतापूर्वक पेश कर रही हैं।

इलेक्ट्रिक सेगमेंट का गणित

इलेक्ट्रिक सेगमेंट में कॉम्पिटिशन और भी कड़ा होता जा रहा है। Mahindra Last Mile Mobility फिलहाल 12,848 इलेक्ट्रिक रजिस्ट्रेशन के साथ सबसे आगे है, वहीं Bajaj Auto 11,974 यूनिट्स के साथ दूसरे नंबर पर है। कुल इलेक्ट्रिक नंबर्स में पीछे होने के बावजूद, Bajaj Auto ने इस कैटेगरी में 55% का ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज किया है, जो Mahindra के 41.9% ग्रोथ रेट से बेहतर है। TVS Motor ने भी शानदार प्रदर्शन किया है, जिसकी इलेक्ट्रिक रजिस्ट्री 82.5% बढ़कर 4,123 यूनिट्स तक पहुंच गई है। इन मैन्युफैक्चरर्स के बीच घटती दूरी इस बात का संकेत है कि इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स का मार्केट बेहद प्रतिस्पर्धी है और कोई भी कंपनी एकतरफा बढ़त बनाए हुए नहीं है।

आर्थिक वजहें और निवेशकों का नज़रिया

इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर की ओर यह बदलाव मुख्य रूप से कमर्शियल यूजर्स के लिए ऑपरेटिंग कॉस्ट में बचत के कारण हो रहा है। ICE इंजन की तुलना में, इलेक्ट्रिक मॉडल्स में फ्यूल और मेंटेनेंस का खर्च कम आता है, जिससे ड्राइवर्स और फ्लीट ऑपरेटर्स की कमाई सीधे तौर पर बढ़ती है। इसके अलावा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और फाइनेंसिंग के बेहतर विकल्पों की उपलब्धता छोटे ऑपरेटर्स के लिए एंट्री बैरियर्स को कम कर रही है।

निवेशकों को कॉम्पिटिशन के बढ़ने के साथ-साथ मार्जिन्स की स्थिरता पर भी नजर रखनी चाहिए। जहां इलेक्ट्रिफिकेशन इन ऑटोमेकर्स के टॉप-लाइन ग्रोथ को सपोर्ट कर रहा है, वहीं प्रॉफिटेबिलिटी इस बात पर निर्भर करेगी कि वे बैटरी की लागत को कैसे मैनेज कर पाते हैं और उस सेगमेंट में अपनी मार्केट हिस्सेदारी कैसे बनाए रखते हैं जहाँ प्राइस सेंसिटिविटी अभी भी बहुत अधिक है। अगले कुछ क्वार्टर्स में मुख्य बात यह होगी कि क्या इलेक्ट्रिक व्हीकल्स कुल पैसेंजर और कार्गो सेगमेंट की बिक्री में 50% का आंकड़ा पार कर पाते हैं, जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है, और क्या कंपनियां इस आक्रामक विस्तार के दौर में अपने प्रॉफिट मार्जिन्स को बनाए रख सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.