त्योहारी सीजन से पहले EV और CNG गाड़ियों की मांग में **30%** का बड़ा उछाल आया है, जिससे कुछ मॉडल्स के लिए वेटिंग पीरियड **24 हफ्ते** तक पहुंच गया है। हालांकि, डीलरों के पास स्टॉक **33-35 दिन** तक बढ़ गया है, जो इंडस्ट्री के **21 दिन** के मानक से कहीं ज्यादा है।
त्योहारी सीजन की आहट के साथ ही भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर एक अजीब स्थिति में फंस गया है। जहां एक तरफ इलेक्ट्रिक और CNG गाड़ियों की पूछताछ और बुकिंग में 30% की भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ शोरूम्स में गाड़ियां डंप हो रही हैं। ग्राहकों को पसंदीदा मॉडल्स के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कुल मिलाकर इन्वेंट्री का बोझ इंडस्ट्री के तय मानकों से कहीं अधिक है।
ग्राहकों का बदलता मूड
क्लीनर फ्यूल की तरफ बढ़ता रुझान इस मांग के पीछे की मुख्य वजह है। साल 2026 के पहले आठ महीनों में पैसेंजर व्हीकल रजिस्ट्रेशन में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी बढ़कर 6.2% हो गई है, जो 2025 में 4.3% थी। इस बढ़ती पॉपुलैरिटी के चलते लोकप्रिय इलेक्ट्रिक वेरिएंट्स की डिलीवरी में अब 24 हफ्ते तक लग रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
इन्वेस्टर्स के लिए सबसे अहम आंकड़ा 'डीलर इन्वेंट्री' है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के मुताबिक, डीलरों के पास औसतन 21 दिन का स्टॉक होना चाहिए, लेकिन अभी यह आंकड़ा 33 से 35 दिन तक पहुंच गया है। इन्वेंट्री का यह दबाव डीलरों के कैश फ्लो को प्रभावित कर सकता है। अगर फेस्टिव सीजन में यह बुकिंग्स फाइनल सेल्स में नहीं बदलीं, तो ऑटो कंपनियों के मार्जिन पर भारी दबाव देखने को मिल सकता है।
कंपनियों का परफॉरमेंस
- Tata Motors: इलेक्ट्रिक सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ के कारण कंपनी को अच्छी बुकिंग मिल रही है।
- JSW MG Motor India: नई गाड़ियों जैसे 'Hector Tomahawk EV' और PHEV के साथ मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ा रही है।
- Maruti Suzuki और Mahindra & Mahindra: ये दिग्गज कंपनियां प्रोडक्शन और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने में जुटी हैं ताकि डिमांड और स्टॉक का सही संतुलन बन सके।
आगे चलकर निवेशकों को स्टील, एल्युमीनियम और रबर जैसी रॉ मटीरियल की कीमतों पर नजर रखनी होगी, जो प्रॉफिट मार्जिन के लिए बड़ा खतरा हैं। फेस्टिव सीजन के नतीजों और कंपनियों के मैनेजमेंट की ओर से आने वाले बयानों पर अब सबकी नजरें टिकी होंगी।
