देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने सरकार से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e-scooters) के लिए एनर्जी-एफिशिएंसी स्टार रेटिंग (Star Rating) लागू करने की योजना को फिलहाल टालने की अपील की है। SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) का कहना है कि यह बाज़ार अभी नया है और ऐसे नियम उपभोक्ताओं के भरोसे और इनोवेशन पर असर डाल सकते हैं।
क्या है नई योजना?
सरकार की योजना थी कि जिस तरह से फ्रिज (Refrigerator) और एयर कंडीशनर (AC) जैसे घरेलू उपकरणों पर एनर्जी एफिशिएंसी (Energy Efficiency) के लिए स्टार रेटिंग दी जाती है, उसी तरह अब ई-स्कूटर्स के लिए भी 1 से 5 स्टार तक की रेटिंग लागू की जाए। इसका मकसद बिजली की खपत कम करना और कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) घटाना है।
क्यों कर रहे हैं कंपनियां विरोध?
Hero MotoCorp, Bajaj Auto, Ather Energy, और TVS Motor जैसी बड़ी कंपनियों का मानना है कि ई-स्कूटर का बाज़ार अभी अपनी शुरुआती दौर में है और यह काफी हद तक सरकारी सब्सिडी (Subsidy) पर निर्भर है। SIAM ने सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि इस समय ऐसी सख्त रेटिंग लागू करने से ग्राहक गुमराह हो सकते हैं। ई-स्कूटर की परफॉरमेंस (Performance) बैटरी टेक्नोलॉजी (Battery Technology) और इस्तेमाल के तरीके पर बहुत निर्भर करती है, जो किसी घरेलू उपकरण से अलग है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
इस फैसले से EV स्पेस में चल रही कंपनियों के लिए रेगुलेटरी अनिश्चितता (Regulatory Uncertainty) बढ़ गई है। ये कंपनियां पहले से ही कम मार्जिन (Profit Margin) पर काम कर रही हैं और प्रोडक्शन बढ़ाने व R&D पर ज़्यादा ध्यान दे रही हैं। ऐसे में, नए नियमों का पालन करने के लिए टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन (Certification) और मॉडल्स में बदलाव पर खर्च बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर उनकी प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर पड़ेगा।
इनोवेशन पर भी असर का खतरा?
उद्योग को यह भी डर है कि फिक्स्ड एनर्जी एफिशिएंसी बेंचमार्क (Fixed Energy Efficiency Benchmark) इनोवेशन (Innovation) पर ब्रेक लगा सकते हैं। कंपनियों को शायद किसी खास रेटिंग को पाने के चक्कर में हाई-परफॉरमेंस बैटरी (High-performance Battery) या मोटर जैसी नई टेक्नोलॉजी पर काम करने से रुकना पड़े।
बाज़ार की ग्रोथ और भविष्य
ई-टू-व्हीलर सेक्टर में पिछले फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) में 20% की बढ़ोतरी के साथ 14 लाख यूनिट्स की बिक्री हुई है। जैसे-जैसे लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपना रहे हैं, सरकार भी डेटा ट्रांसपेरेंसी (Data Transparency) और कंज्यूमर अवेयरनेस (Consumer Awareness) के लिए सख्त नियम ला सकती है। अब देखना होगा कि सरकार इंडस्ट्री की मांग मानकर इस योजना को टालती है या फिर इसे लागू करने के लिए कोई दूसरा रास्ता निकालती है।
