European Union ने चीन से आने वाली हाइब्रिड कारों पर सालाना **350,000** यूनिट्स का कैप लगा दिया है। इससे BYD और Geely जैसी दिग्गज कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है, क्योंकि अब उन्हें ट्रेड बैरियर्स से बचने के लिए यूरोप में ही मैन्युफैक्चरिंग शुरू करनी होगी।
रेगुलेटरी दबाव और नई चुनौतियां
European Union की यह नई पाबंदी World Trade Organization के सेफ्टी गाइडलाइंस के अनुरूप है। इस कदम से BYD, Chery, और SAIC जैसी चीनी दिग्गज कंपनियों को अपने बिज़नेस मॉडल को रातों-रात बदलना पड़ रहा है, जो अब तक यूरोप में जमकर गाड़ियां एक्सपोर्ट कर रही थीं।
मार्जिन पर दोहरी मार
यह ट्रेड पाबंदी एक ऐसे समय में आई है जब चीन में भी एक्सपोर्ट टैक्स रिबेट कम होने वाली है। एक्सपोर्ट सपोर्ट जो पहले 13% था, वह अप्रैल 2027 तक गिरकर 9% रह जाएगा। निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि इन कंपनियों के मार्जिन पर गहरा असर पड़ेगा। अब उनके लिए Volkswagen और Skoda जैसी कंपनियों से सस्ती कीमत पर मुकाबला करना पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।
लक्ज़री का फेलियर और SUVs पर दांव
चीनी कंपनियों ने पहले यूरोप में लक्ज़री मार्केट पर फोकस किया था, लेकिन Denza Z9GT जैसे प्रीमियम मॉडल वहां खास कमाल नहीं दिखा पाए। कंज्यूमर्स इन ब्रांड्स पर भारी पैसा खर्च करने से कतरा रहे हैं। यही वजह है कि अब ये कंपनियां mid-sized SUVs जैसे कि BYD Seal U पर शिफ्ट हो रही हैं, जो वैल्यू-फॉर-मनी के चलते मार्केट में टिक पा रही हैं।
यूरोप में लोकल मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी
ट्रेड बैरियर्स से बचने के लिए अब कंपनियां यूरोप के अंदर ही प्लांट लगाने की तैयारी में हैं:
- Zhejiang Leapmotor Technology: स्पेन में B10 इलेक्ट्रिक SUV का उत्पादन शुरू कर चुकी है।
- BYD: 2027 तक हंगरी (Hungary) में अपना ऑपरेशन शुरू करने के लिए जोर-शोर से काम कर रही है।
- Geely Automobile Holdings: स्पेन में Ford के साथ मिलकर एक जॉइंट वेंचर पर काम कर रही है, जिसके 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है।
हालांकि, ये भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट कंपनियों के कैश फ्लो पर दबाव डाल सकते हैं। अब देखना ये होगा कि ये कंपनियां कितनी जल्दी अपने प्लांट चालू कर पाती हैं और यूरोप के चुनौतीपूर्ण माहौल में प्रॉफिट कैसे बचाए रखती हैं।
