Dhoot Transmission ने दूसरी तिमाही के शानदार नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **61%** बढ़कर **₹1,827 करोड़** पर पहुंच गया है, जिसके पीछे इलेक्ट्रिक व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट की मजबूत परफॉर्मेंस का बड़ा हाथ है। हालांकि, कच्चे माल की कीमतों में तेजी का असर मार्जिन पर भी देखने को मिला है।
मुनाफे में रफ्तार और मार्जिन का गणित
ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली इस कंपनी का EV और इलेक्ट्रॉनिक्स डिवीजन इस तिमाही में स्टार परफॉर्मर रहा, जिसने कुल सेल में 31% की हिस्सेदारी दर्ज की है। खास बात यह है कि इस डिवीजन में पिछले साल के मुकाबले 108% की जबरदस्त ग्रोथ देखी गई है। यह ग्रोथ मल्टीलिंक (Multilink) के अधिग्रहण का नतीजा है, जिसे कंपनी ने ₹421.2 करोड़ में खरीदा था।
हालाँकि, रेवेन्यू में उछाल के बावजूद कंपनी के मार्जिन पर दबाव है। EBITDA मार्जिन गिरकर 14.3% रह गया है, जो पिछले साल इसी दौरान 17.6% था। इसके पीछे मुख्य वजह कॉपर और पीवीसी जैसे कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और कर्मचारियों के लिए स्टॉक ऑप्शन प्लान का खर्च है। कंपनी का एडजस्टेड नेट प्रॉफिट 30.4% बढ़कर ₹1,615 मिलियन रहा, जबकि रिपोर्टेड नेट प्रॉफिट ₹1,178 मिलियन पर सेटल हुआ।
कर्ज कम करने पर जोर
अगस्त 2026 में आए IPO के बाद, कंपनी अपने बैलेंस शीट को मजबूत करने पर पूरी तरह फोकस कर रही है। कंपनी ने अब तक अपने कर्ज में ₹617.4 करोड़ की कटौती की है, जिससे नेट कैश पोजीशन बढ़कर ₹903.7 करोड़ हो गई है।
आगे की रणनीति
बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कंपनी ने इजराइल की Ride Vision के साथ पार्टनरशिप की है, जिसके तहत ड्राइवर-अलर्ट सिस्टम तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा पुणे, चेन्नई, झज्जर और होसुर में कंपनी के नए मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है, जिनके FY28 तक पूरे होने की उम्मीद है। निवेशकों की नजर अब इस पर होगी कि कंपनी कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कैसे अपने मुनाफे को मैनेज करती है।
