ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी Dhoot Transmission अपना ₹3,066.89 करोड़ का IPO अगले साल 10 अगस्त, 2026 को लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने ₹829 से ₹871 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इस इश्यू में फ्रेश शेयर्स जारी होंगे, जिसका इस्तेमाल कर्ज चुकाने और कंपनी का विस्तार करने में होगा, साथ ही मौजूदा निवेशकों को बाहर निकलने का मौका भी मिलेगा। Dhoot Transmission भविष्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट से ग्रोथ की उम्मीद कर रही है।
Dhoot Transmission IPO: निवेशकों के लिए बड़ा मौका!
ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी Dhoot Transmission, जिसे प्राइवेट इक्विटी फर्म Bain Capital का भी समर्थन प्राप्त है, अगले साल 10 अगस्त, 2026 को अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लेकर आ रही है। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए कुल ₹3,066.89 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। निवेशक 12 अगस्त, 2026 तक इस आईपीओ में पैसा लगा सकेंगे।
इस IPO के लिए शेयर की कीमत ₹829 से ₹871 प्रति इक्विटी शेयर के बीच रखी गई है। कुल इश्यू में ₹1,400 करोड़ के फ्रेश शेयर्स शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल कंपनी अपने कर्ज को चुकाने और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में करेगी। वहीं, ₹1,666.89 करोड़ का हिस्सा ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत आएगा, जिसमें मौजूदा निवेशक, खासकर Bain Capital, अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
EV सेगमेंट पर कंपनी का दांव!
छत्रपति संभाजीनगर की Dhoot Transmission ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए वायरिंग हार्नेस बनाती है। कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी का अहम हिस्सा अपने पारंपरिक बिजनेस से आगे बढ़कर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट पर फोकस करना है। कंपनी बैटरी असेंबली, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोलर और ऑनबोर्ड चार्जर जैसे EV-विशिष्ट कंपोनेंट्स का पोर्टफोलियो तैयार कर रही है। इस बदलाव का असर कंपनी के नतीजों में भी दिखने लगा है, जहां फाइनेंशियल ईयर 2026 में EV-संबंधित रेवेन्यू का योगदान 24.18% रहा।
फाइनेंशियल ईयर 2026 में, कंपनी ने कुल ₹4,563.70 करोड़ का रेवेन्यू और ₹396.84 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। कंपनी का बिजनेस भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वाहनों की ग्रोथ से जुड़ा है, जिसके प्रमुख ग्राहकों में Bajaj Auto जैसी कंपनियां शामिल हैं।
IPO में रिस्क और बड़े सवाल!
कंपनी के भविष्य की बात करें तो इसकी ग्रोथ का दारोमदार भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर की डिमांड पर काफी हद तक निर्भर करेगा। अगर इन वाहनों की मांग में कमी आती है, तो सीधे तौर पर कंपनी के रेवेन्यू पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, कंपनी EV कंपोनेंट्स के लिए नई मैन्युफैक्चरिंग लाइनें लगा रही है, जिसमें बड़े ऑटोमोटिव ग्राहकों की क्वालिटी और वॉल्यूम की जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी।
IPO स्ट्रक्चर की बात करें तो, मौजूदा निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी बिक रही है। इसका मतलब है कि IPO से जुटाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा सीधे कंपनी के बिजनेस ऑपरेशन्स में जाने के बजाय मौजूदा निवेशकों को मिलेगा। शेयरों की लिस्टिंग BSE और NSE पर 17 अगस्त, 2026 को होने की उम्मीद है। IPO का कंपनी की वित्तीय स्थिति पर अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी नए फंड का उपयोग कर्ज कम करने में कितनी प्रभावी ढंग से करती है और नए प्रोडक्ट लाइन को बढ़ाते हुए अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख पाती है या नहीं।
