ऑटो कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनी Dhoot Transmission का ₹3,067 करोड़ का IPO आज, 10 अगस्त 2026 को खुल गया है। कंपनी ने पब्लिक सब्सक्रिप्शन से पहले ही 72 एंकर निवेशकों से ₹918.27 करोड़ जुटा लिए हैं। ये पैसा शेयर की अपर प्राइस बैंड ₹871 के हिसाब से लगाया गया है।
एंकर बुक में निवेशकों का भरोसा
Dhoot Transmission ने अपने IPO के लिए एंकर निवेशकों (Anchor Investors) से शानदार प्रतिक्रिया हासिल की है। कंपनी ने ₹918.27 करोड़ का फंड जुटाया है, जिसमें 72 संस्थागत निवेशकों ने भाग लिया। इन सभी को शेयर ₹871 प्रति शेयर के भाव पर आवंटित किए गए, जो प्राइस बैंड के ऊपरी सिरे पर है। इस एंकर राउंड में डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) का दबदबा रहा, जिन्होंने कुल आवंटन का 60% से अधिक हिस्सा लिया। बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स ने भी इसमें निवेश किया है।
IPO का साइज़ और इस्तेमाल
यह IPO कुल ₹3,066.89 करोड़ का है। इसमें ₹1,400 करोड़ का फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) और ₹1,666.89 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (Offer For Sale) शामिल है। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल अपने मौजूदा कर्ज को चुकाने, सब्सिडियरी में निवेश करने और झाज्जर व होसुर स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की क्षमता बढ़ाने के लिए करेगी। इसका मकसद ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स, जैसे वायरिंग हार्नेस और स्विच, का प्रोडक्शन बढ़ाना है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति
फाइनेंशियल ईयर 2026 में Dhoot Transmission ने ₹4,524.96 करोड़ का रेवेन्यू और ₹396.84 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) लगभग 15.71% रहा। फिलहाल, Bain Capital के पास कंपनी में 49% हिस्सेदारी है, जो इसके बड़े प्राइवेट इक्विटी बैकिंग को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें
यह IPO उन निवेशकों के लिए खुला है जो ऑटो सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं। सब्सक्रिप्शन 12 अगस्त 2026 तक खुला रहेगा। रिटेल निवेशक कम से कम 17 शेयर के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसका मतलब है कि एक लॉट के लिए ₹14,807 का निवेश करना होगा। कंपनी के शेयर 17 अगस्त 2026 को BSE और NSE पर लिस्ट होने की उम्मीद है।
ध्यान देने योग्य रिस्क
हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी गौर करना चाहिए। कंपनी का 80% से अधिक रेवेन्यू टॉप 10 ग्राहकों से आता है, जिससे कस्टमर कॉन्सेंट्रेशन (Customer Concentration) का रिस्क है। ऑटो इंडस्ट्री के साइक्लिकल नेचर (Cyclical Nature) के कारण कंपनी का प्रदर्शन वाहन बिक्री पर निर्भर करता है। इसके अलावा, कच्चे माल (जैसे कॉपर और प्लास्टिक) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और फॉरेन एक्सचेंज (Foreign Exchange) में बदलाव भी प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं।
