दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार देने के लिए **180** नए चार्जिंग साइट्स पर काम शुरू कर रही है। ये टेंडर **2027** और **2028** तक होने वाले अनिवार्य इलेक्ट्रिफिकेशन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लाए जा रहे हैं।
बड़े बदलाव की तैयारी
दिल्ली सरकार अपनी 'दिल्ली EV पॉलिसी 2026' के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है। भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) द्वारा 382 संभावित साइटों को मंजूरी मिलने के बाद, अब सरकार 180 चार्जिंग स्टेशनों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। यह कदम शहर की बदलती जरूरतों के हिसाब से एक बड़ा नेटवर्क बनाने की कोशिश है।
डेडलाइन और नियम
इलेक्ट्रिफिकेशन की ये समय सीमा काफी सख्त है। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और N1 ट्रकों के रजिस्ट्रेशन होंगे। वहीं, 1 अप्रैल 2028 से टू-व्हीलर्स का पूर्ण इलेक्ट्रिफिकेशन अनिवार्य हो जाएगा। इन डेडलाइंस को देखते हुए सरकार समय रहते चार्जिंग कैपेसिटी तैयार करने पर जोर दे रही है।
प्रोजेक्ट की खास बातें
- प्रोजेक्ट मैनेजमेंट: इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए KPMG को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट नियुक्त किया गया है।
- रणनीति में बदलाव: सरकार अब 'जेनेरिक' चार्जिंग पॉइंट के बजाय वाहनों के टाइप (2-व्हीलर, 3-व्हीलर, 4-व्हीलर) के अनुसार कस्टमाइज्ड पॉइंट लगाएगी।
- जमीन की समस्या: साइट्स के लिए राजस्व विभाग की जमीन और दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) की प्रॉपर्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि जमीन की कमी न आड़े आए।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इस इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार का सीधा असर चार्जिंग हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियों, EV सप्लाई इक्विपमेंट प्रोवाइडर्स और EPC कॉन्ट्रैक्टर्स पर पड़ेगा। हालांकि, असल फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि काम कितनी तेजी से होता है और पावर ग्रिड इस बढ़ते लोड को कैसे हैंडल करता है। सरकार ने 'सिंगल-विंडो सिस्टम' भी शुरू किया है, जो हाउसिंग सोसायटियों में EV मीटर लगवाने में मदद करेगा, जिससे प्राइवेट चार्जिंग की मांग भी बढ़ सकती है।
