दिल्ली सरकार ने बड़ा ऐलान किया है! 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए पेट्रोल और सीएनजी टू-व्हीलर की बिक्री और रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएंगे। वहीं, 1 जनवरी 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा ही रजिस्टर होंगे। सरकार 2026-2030 EV पॉलिसी के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर ₹30,000 और थ्री-व्हीलर पर ₹50,000 की सब्सिडी भी देगी।
क्या है नया नियम?
दिल्ली सरकार ने 2026-2030 के लिए नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी को मंजूरी दे दी है, जो 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। इस पॉलिसी के तहत प्रदूषण कम करने के लिए पुराने इंजन वाले वाहनों को धीरे-धीरे बंद किया जाएगा। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए रजिस्ट्रेशन के लिए सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा ही मान्य होंगे। इसके बाद, 1 अप्रैल 2028 से पेट्रोल और सीएनजी टू-व्हीलर की बिक्री और रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से बंद कर दिए जाएंगे। दिल्ली में गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण हवा की गुणवत्ता को करीब 23% तक खराब करता है, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
ऑटो कंपनियों पर क्या होगा असर?
इस पॉलिसी से ऑटोमोबाइल कंपनियों को दिल्ली के मार्केट के लिए अपनी रणनीति बदलनी होगी। Bajaj Auto, Hero MotoCorp और TVS Motor Company जैसी बड़ी कंपनियां पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर फोकस कर रही हैं, लेकिन इस नियम से उन्हें तेजी से EV प्रोडक्शन बढ़ाना होगा। इन कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि उनके इलेक्ट्रिक मॉडल कीमत और रेंज के मामले में पेट्रोल मॉडलों को टक्कर दे सकें। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि ये कंपनियां कितनी जल्दी अपनी प्रोडक्शन लाइनों और सप्लाई चेन को नए नियमों के मुताबिक ढाल पाती हैं।
सब्सिडी और डिमांड का गणित
ग्राहकों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु, सरकार सब्सिडी का ऐलान कर रही है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वालों को ₹30,000 की सब्सिडी मिलेगी, जबकि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए यह राशि ₹50,000 होगी (पहले साल के लिए)। सरकार ने हाइब्रिड वाहनों पर कोई सब्सिडी न देने का फैसला किया है, जो पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का संकेत देता है। ये सब्सिडी खरीदारों के लिए शुरुआती लागत कम कर सकती है, जो बड़े पैमाने पर EV अपनाने के लिए जरूरी है। हालांकि, लंबे समय में कंपनी के मुनाफे पर इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वे अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट को कैसे मैनेज करते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे जोखिम
नए नियमों के तहत पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करने में कई मुश्किलें आ सकती हैं। सबसे बड़ी चिंता चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता को लेकर है। अगर चार्जिंग स्टेशन उतनी तेजी से नहीं बढ़े जितने तेजी से वाहनों की बिक्री हो रही है, तो डिमांड पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कंपनियों को बैटरी टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन रिसर्च में भारी निवेश करना होगा। जिन कंपनियों ने पारंपरिक पेट्रोल और डीज़ल इंजन से कमाई की है, उनके लिए यह बदलाव短期 earnings पर दबाव डाल सकता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
आगे चलकर, निवेशकों को प्रमुख टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर कंपनियों की दिल्ली के लिए EV प्रोडक्शन कैपेसिटी और सेल्स स्ट्रेटेजी पर मैनेजमेंट की कमेंट्री पर ध्यान देना होगा। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की रफ्तार भी महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा, तिमाही बिक्री के आंकड़ों में EV और पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों के अनुपात पर नजर रखना यह समझने में मदद करेगा कि कंपनियां बदलते नियमों के साथ कितनी अच्छी तरह तालमेल बिठा रही हैं।
