Delhi-NCR में प्रदूषण कम करने के लिए एक सरकारी समिति ने बड़ा प्रस्ताव रखा है। इसके तहत 2030 तक सभी नई पैसेंजर कारों का Zero-Emission होना अनिवार्य हो सकता है, साथ ही 2027 के लिए **20%** का अंतरिम लक्ष्य तय किया गया है।
क्या है नया प्रस्ताव?
IIT Madras के प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला की अध्यक्षता वाली एक एक्सपर्ट कमेटी ने दिल्ली-NCR के लिए एक सख्त रोडमैप तैयार किया है। इस पैनल में AIIMS के पूर्व डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया जैसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य PM2.5 के खतरनाक स्तर को कम करना है। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, 2027 तक नई गाड़ियों की कुल बिक्री में 20% हिस्सा Zero-Emission वाहनों (इलेक्ट्रिक या हाइड्रोजन) का होना चाहिए, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 100% करना होगा।
इंडस्ट्री का कड़ा विरोध
इस सिफारिश के आते ही CNG, इथेनॉल और बायोगैस से जुड़ी इंडस्ट्री एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। उनका तर्क है कि प्रदूषण का असली कारण नई कारें नहीं, बल्कि सड़कों पर दौड़ रही पुरानी और अनफिट गाड़ियां हैं। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 95% से ज्यादा प्रदूषण BS-VI मानकों से नीचे वाली पुरानी गाड़ियों से होता है।
ऑटो कंपनियों के लिए चुनौती
Maruti Suzuki जैसी ऑटो कंपनियां, जिन्होंने CNG और मल्टी-फ्यूल इंजन टेक्नोलॉजी में भारी निवेश किया है, उनके लिए यह बड़ा झटका हो सकता है। अगर यह प्रस्ताव नीति का रूप लेता है, तो कंपनियों को अपनी प्रोडक्ट स्ट्रेटजी और डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल को तेजी से बदलना होगा। अभी CAQM (Commission for Air Quality Management) इस मामले की व्यावहारिकता पर विचार कर रहा है, और निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि रेगुलेटर स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और इंडस्ट्री की 'टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल' मांग के बीच क्या संतुलन बनाता है।
