दिल्ली सरकार ने पुराने, प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और बसों को BS-VI और इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए PARIVARTAN स्कीम लॉन्च की है। इसके तहत मालिकों को मैन्युफैक्चरर डिस्काउंट, इंटरेस्ट सब्सिडी और टैक्स छूट का फायदा मिलेगा। इस पहल का मकसद NCR में कमर्शियल बेड़े को अपग्रेड करके वायु प्रदूषण कम करना है।
दिल्ली में नई 'PARIVARTAN' स्कीम की शुरुआत
दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में कमर्शियल वाहनों के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ी नीतिगत पहल 'PARIVARTAN' स्कीम को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य पुराने, ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और बसों को हटाकर उनकी जगह नए BS-VI इंजन वाले मॉडल या इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) लाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों का सहयोग
इस मुहिम में Tata Motors, Ashok Leyland और Switch Mobility जैसी प्रमुख कमर्शियल वाहन बनाने वाली कंपनियों ने हिस्सा लिया है। ये कंपनियां भारतीय हैवी व्हीकल मार्केट का एक बड़ा हिस्सा कवर करती हैं और उन्होंने नए वाहनों की खरीद पर 8% तक की छूट देने का वादा किया है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर मिलने वाली छूट को, पारंपरिक ईंधन वाले मॉडलों के बराबर ही सीमित रखा गया है, ताकि सभी के लिए एक समान अवसर बना रहे।
वित्तीय मदद और टैक्स में राहत
यह स्कीम वाहन मालिकों को नई तकनीक अपनाने के लिए कई स्तरों पर वित्तीय प्रोत्साहन दे रही है। केंद्र सरकार इन वाहनों के अपग्रेड के लिए लिए गए लोन पर 5% की इंटरेस्ट सबवेंशन (ब्याज सब्सिडी) दे रही है, जिससे लोन की लागत कम हो जाती है। इसके अलावा, वाहन मालिकों को पांच साल तक हर महीने फिक्स्ड फ्यूल वाउचर भी मिलेंगे।
खास तौर पर इलेक्ट्रिक लाइट गुड्स व्हीकल (LGVs) को अपनाने पर जोर दिया गया है। जो मालिक पुराने BS-IV या उससे पहले के वाहनों को स्क्रैप करके नया इलेक्ट्रिक LGV खरीदते हैं, उन्हें दस साल के लिए मोटर व्हीकल टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट मिलेगी। वहीं, अगर कोई पुराना इलेक्ट्रिक LGV खरीदता है, तो उसे भी इसी अवधि के लिए 50% टैक्स छूट के साथ-साथ इंटरेस्ट सबवेंशन और एक बार का वाउचर बेनिफिट मिलेगा।
पर्यावरण और परिचालन पर असर
इस पहल का लक्ष्य क्षेत्र के करीब 2.07 लाख कमर्शियल वाहन मालिकों के लिए ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना है। बस ऑपरेटरों के लिए, इस स्कीम के तहत BS-VI कंप्लायंट CNG मॉडल या पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहन ही बदलने के लिए अनिवार्य हैं। यह दिल्ली EV पॉलिसी-2026 के लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका मकसद राजधानी में ट्रांसपोर्ट से होने वाले उत्सर्जन को कम करना और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
हालांकि, इस स्कीम से बेड़े के आधुनिकीकरण में स्पष्ट लाभ दिख रहे हैं, लेकिन इसकी लंबी अवधि की सफलता कई व्यावहारिक कारकों पर निर्भर करेगी। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनियां कितनी तेजी से मांग को पूरा करने के लिए कंप्लायंट वाहनों की सप्लाई बढ़ा पाती हैं। साथ ही, छोटे फ्लीट ऑपरेटरों द्वारा इसे अपनाने की दरें भी स्कीम की प्रभावशीलता को मांपेंगी, क्योंकि नई गाड़ियों की शुरुआती लागत उनके लिए एक चुनौती हो सकती है, भले ही सरकारी सब्सिडी और वाउचर उपलब्ध हों। आने वाली तिमाहियों में इंडस्ट्री के लिए इलेक्ट्रिक बस और LGV कैटेगरी के लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की गति भी एक महत्वपूर्ण कारक होगी।
