Delhi EV Policy 2.0: अप्रैल 2028 से पेट्रोल टू-व्हीलर पर लगेगी रोक, सरकार का बड़ा फैसला

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Delhi EV Policy 2.0: अप्रैल 2028 से पेट्रोल टू-व्हीलर पर लगेगी रोक, सरकार का बड़ा फैसला

दिल्ली सरकार अपनी नई ईवी पॉलिसी 2.0 के तहत 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने की तैयारी में है। ऑटो इंडस्ट्री की चिंताओं के बावजूद, यह कदम राजधानी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने का एक अहम हिस्सा है।

क्या है नई पॉलिसी?

दिल्ली सरकार ने अपनी नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 के तहत एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाले इंटरनल कम्बस्चन इंजन (ICE) वाले टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा देगी। यह कदम राजधानी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने की रफ़्तार तेज़ करने के लिए उठाया गया है। इस पॉलिसी को जल्द ही कैबिनेट मीटिंग में पेश किया जाएगा और यह अगले महीने से लागू हो सकती है। यह मौजूदा ईवी पॉलिसी की जगह लेगी, जो 30 जून 2026 को एक्सपायर हो रही है।

इंडस्ट्री और सरकार में टकराव

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने दिल्ली सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी। इंडस्ट्री का कहना है कि नए भारत स्टेज VI (BS-VI) पेट्रोल टू-व्हीलर में एडवांस्ड एमिशन कंट्रोल सिस्टम लगे होते हैं, जो पार्टिकुलेट मैटर को काफी कम करते हैं।

ऑटो कंपनियों का तर्क है कि नए पेट्रोल वाहनों पर बैन लगाने से दिल्ली की हवा की क्वालिटी में कोई खास सुधार नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया था कि पुरानी, प्री-BS-IV गाड़ियों को बैन करने पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए, जिनसे लगभग 99.5% पार्टिकुलेट मैटर निकलता है। इसके बावजूद, सरकार ने 2028 की समय-सीमा पर अपनी बात पक्की रखी है।

ऑटो कंपनियों के लिए क्या मायने?

बजाज ऑटो (Bajaj Auto), हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) और टीवीएस मोटर (TVS Motor) जैसी बड़ी टू-व्हीलर कंपनियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। दिल्ली में गाड़ियों की बिक्री काफी ज़्यादा होती है, और राजधानी में इलेक्ट्रिक-ओनली रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता कंपनियों के प्रोडक्शन और इन्वेंटरी मैनेजमेंट पर दबाव डालेगी।

हालांकि ईवी को अपनाने का चलन बढ़ रहा है, लेकिन कंपनियों को चिंता है कि 2028 तक डिलीवरी वर्कर्स और लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए मौजूदा ईवी इकोसिस्टम रेंज, लागत और लोडिंग कैपेसिटी के मामले में पेट्रोल वाहनों का पूरी तरह से विकल्प नहीं बन पाएगा। इस नियम के तहत, कंपनियों को दिल्ली मार्केट के लिए अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल पोर्टफोलियो और सप्लाई चेन को तेज़ी से मज़बूत करना होगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती

मैन्युफैक्चरिंग और बिक्री के अलावा, इस फैसले की सफलता शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी निर्भर करती है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बदलाव के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर बढ़ाना होगा। फिलहाल, चार्जिंग पॉइंट लगाने का काम उम्मीदों से काफी पीछे चल रहा है। 2028 तक सफल ट्रांजीशन के लिए न केवल इलेक्ट्रिक बाइक्स और स्कूटर्स की उपलब्धता ज़रूरी होगी, बल्कि यह भी देखना होगा कि ग्रिड और चार्जिंग नेटवर्क बढ़ते लोड को संभाल पाते हैं या नहीं, ताकि ग्राहकों को कोई परेशानी न हो।

आगे क्या देखें?

निवेशक ईवी पॉलिसी 2.0 की फाइनल नोटिफिकेशन पर नज़र रख सकते हैं, जिसमें सब्सिडी और नियमों की जानकारी होगी। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ़्तार, दिल्ली में इलेक्ट्रिक और पेट्रोल टू-व्हीलर की बिक्री का अनुपात, और चार्जिंग सपोर्ट या इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेशों में किसी भी तरह के बदलाव पर नज़र रखना अहम होगा।

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