जर्मन टायर दिग्गज Continental AG अपना मोदीपुरम, उत्तर प्रदेश स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बेचने की तैयारी कर रही है। यह सौदा **₹1,000 करोड़** से अधिक का हो सकता है क्योंकि कंपनी अपनी अंडर-यूटिलाइज्ड (underutilized) क्षमता को सुधारने पर ध्यान दे रही है।
बड़े बदलाव की तैयारी
Continental AG अपने मोदीपुरम प्लांट के विनिवेश (divestment) की योजना बना रही है। कंपनी का लक्ष्य इस एसेट के लिए ₹1,000 करोड़ से ज्यादा का वैल्यूएशन हासिल करना है। इस दौड़ में Ralson Tyres समेत एक चीनी टायर निर्माता कंपनी का नाम भी चर्चा में है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह कदम कंपनी की रणनीतिक री-अलाइनमेंट का हिस्सा है। जून 2025 में ही कंपनी ने इस प्लांट में 'ट्रक एंड बस रेडियल' (TBR) टायरों का प्रोडक्शन बंद कर दिया था। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य भारत में प्रीमियम 'पैसेंजर एंड लाइट ट्रक' (PLT) टायर सेगमेंट पर फोकस करना था। हालांकि, पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण प्लांट अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा था, जिसके बाद अब इसे बेचने का फैसला लिया गया है।
कंपनी का पक्ष
हालांकि कंपनी ने किसी औपचारिक एक्सचेंज फाइलिंग में इस बिक्री की पुष्टि नहीं की है, लेकिन आधिकारिक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि भारत उनके लिए एक महत्वपूर्ण मार्केट बना रहेगा। कंपनी का जोर अपने लोकल ग्राहकों के लिए सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने पर है।
टायर सेक्टर के लिए क्या है संकेत?
यह संभावित बिक्री भारतीय टायर इंडस्ट्री में मैन्युफैक्चरिंग दक्षता (efficiency) के दबाव को दर्शाती है। कच्चे माल की अस्थिरता और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, विदेशी कंपनियां अब मास-मार्केट के बजाय प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि यह रीस्ट्रक्चरिंग कंपनी की भविष्य की उत्पादन क्षमता को कैसे प्रभावित करती है।
