चीन के भारी-भरकम लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बड़ा बदलाव दिख रहा है। साल 2026 की पहली छमाही में इलेक्ट्रिक ट्रकों की बिक्री में **80%** का जबरदस्त उछाल आया है, जिसके पीछे डीजल की अस्थिर कीमतें और सरकारी सपोर्ट मुख्य वजह हैं।
चीन का हैवी-ड्यूटी लॉजिस्टिक्स सेक्टर अब तेजी से बैटरी से चलने वाले ट्रकों की ओर रुख कर रहा है। हालिया डेटा के मुताबिक, साल 2026 की पहली छमाही में इनकी बिक्री पिछले साल के मुकाबले 80% बढ़ गई है। यह बदलाव इतना तेज है कि साल के अंत तक चीन में बिकने वाले हर 3 में से 1 नया ट्रक इलेक्ट्रिक हो सकता है, जो कि 2 साल पहले केवल 8% था।
क्यों इलेक्ट्रिक ट्रक बन रहे हैं पहली पसंद?
इलेक्ट्रिक ट्रकों की शुरुआती कीमत औसतन 6,00,000 युआन है, जो डीजल ट्रकों के 4,00,000 युआन की तुलना में ज्यादा है। बावजूद इसके, लॉन्ग-टर्म में ये काफी सस्ते पड़ रहे हैं। ऑपरेटर्स का कहना है कि चार्जिंग का खर्च डीजल के मुकाबले 1/3 से भी कम आता है। डीजल की कीमतों में अस्थिरता के कारण लॉजिस्टिक्स कंपनियां अब इलेक्ट्रिक मॉडल को अपना रही हैं ताकि वे ग्लोबल फ्यूल मार्केट के झटकों से बच सकें।
सरकारी स्ट्रैटेजी और कंपनियों का रुख
बीजिंग अब अपनी फ्रेट इंडस्ट्री को इंटरनेशनल ऑयल मार्केट पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसके तहत इलेक्ट्रिक फ्लीट्स को शहरों में प्राथमिकता दी जा रही है। इसका फायदा BYD, Sany Heavy Industry, और XCMG Construction Machinery जैसी दिग्गज कंपनियां उठा रही हैं, जिन्होंने अपने प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट में भारी इजाफा किया है। साल की पहली छमाही में चीन से इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों का एक्सपोर्ट दो गुना से ज्यादा हो गया है।
आगे की राह
हालाँकि, अभी भी ऊंची शुरुआती लागत और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत जैसे चुनौतियां बरकरार हैं। इस ग्रोथ की रफ्तार पूरी तरह से सरकारी सब्सिडी और बैटरी की लागत पर निर्भर करेगी, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
