चीन ने अपने 15वें फाइव-ईयर प्लान में 2030 तक बड़े पैमाने पर ऑटोनॉमस व्हीकल्स को उतारने का लक्ष्य रखा है। नई पॉलिसी के तहत **70%** नई पैसेंजर कारें 'न्यू एनर्जी व्हीकल' (NEV) होंगी, जो सीधे तौर पर AI और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर इशारा करती हैं।
बड़े बदलाव की तैयारी
चीन ने इंटेलिजेंट कनेक्टेड व्हीकल इंडस्ट्री के लिए अपना 15वां फाइव-ईयर प्लान पेश किया है। इस प्लान का मुख्य उद्देश्य सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाना नहीं, बल्कि हाईवे और बड़े शहरों की सड़कों पर हाई-लेवल ऑटोमेशन लाना है। सरकार ने 1 जुलाई, 2027 से लेवल-3 और लेवल-4 ऑटोनॉमस सिस्टम के लिए नए सुरक्षा मानक (Safety Standards) अनिवार्य कर दिए हैं, जो इस टेक्नोलॉजी को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
'व्हीकल-रोड-क्लाउड' का मंत्र
चीन अब 'व्हीकल-रोड-क्लाउड' इंटीग्रेशन पर जोर दे रहा है। इसका मतलब है कि गाड़ियां लगातार क्लाउड सिस्टम, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड सेंसर नेटवर्क के संपर्क में रहेंगी। इसके लिए देश को AI चिप्स और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी में अपनी सप्लाई चेन को और मजबूत करना होगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी: 'कंसोलिडेशन' का दौर
हालांकि विजन बड़ा है, लेकिन मार्केट की स्थिति अभी काफी कठिन है। फिलहाल चल रही प्राइस वॉर ने कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल रखा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मार्केट बहुत ज्यादा बिखरा हुआ है और 2030 तक मुश्किल से 15 ब्रांड्स ही आर्थिक रूप से टिक पाएंगे। बाकी कंपनियों के लिए अस्तित्व बचाना चुनौती होगा।
आगे की राह
इन्वेस्टर्स के लिए अब यह देखना जरूरी है कि कौन सी कंपनियां 2027 के सुरक्षा मानकों को पूरा कर पाती हैं और प्राइस वॉर के बावजूद अपनी फाइनेंशियल हेल्थ बरकरार रखती हैं। टेक्नोलॉजी की जटिलता और कमर्शियल वायबिलिटी ही यह तय करेगी कि कौन सी कंपनी इस रेस में विजेता बनकर उभरेगी।
