एक्सपोर्ट्स बने ग्रोथ का मुख्य इंजन
घरेलू बिक्री में सुस्ती के बीच, चीन की कार कंपनियों के लिए एक्सपोर्ट्स ग्रोथ का सबसे बड़ा जरिया बन गए हैं। मार्च में 748,000 पैसेंजर व्हीकल्स का एक्सपोर्ट हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 82.4% ज्यादा है। खास तौर पर, न्यू एनर्जी व्हीकल्स (NEVs) के एक्सपोर्ट्स में तो 140% का विस्फोटक उछाल देखने को मिला। यह दिखाता है कि चीनी कंपनियां अब ग्लोबल लेवल पर अपनी पैठ बढ़ा रही हैं।
डोमेस्टिक मार्केट में गहरी चिंता
वहीं दूसरी ओर, चीन का अपना पैसेंजर कार मार्केट मार्च में 19.2% गिर गया, जो लगातार पांचवें महीने की गिरावट है। इस गिरावट की वजह कम सरकारी इंसेंटिव्स, जबरदस्त घरेलू प्रतिस्पर्धा और धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था हैं। इस स्थिति में, BYD और Geely Auto जैसी कंपनियों के लिए एक्सपोर्ट्स उनकी बिक्री को बनाए रखने और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने का अहम जरिया बन गए हैं। BYD का मार्केट कैप करीब $136 बिलियन USD, स्टॉक प्राइस लगभग $13.12 और Geely Auto का मार्केट कैप $33.61 बिलियन USD, स्टॉक प्राइस लगभग HK$24.38 है, जो उनके ग्लोबल विस्तार की ओर इशारा करता है।
ग्लोबल एक्सपेंशन पर मंडराते खतरे
हालांकि, एक्सपोर्ट्स में यह बड़ी वृद्धि चीन की ऑटो कंपनियों के लिए कई चुनौतियां भी लेकर आई है। यूरोपीय संघ (EU) चीनी ईवी सब्सिडी की जांच कर रहा है, जिससे टैरिफ लगने का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में भी ऐसी ही ट्रेड पॉलिसीज से कंपनी की बाजार पहुंच सीमित हो सकती है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ी चुनौती है। Tesla जैसी कंपनियां भी ईवी मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।
EV एक्सपोर्ट्स में दबदबा
NEVs के एक्सपोर्ट्स में 140% की वृद्धि यह साबित करती है कि चीन इलेक्ट्रिक वाहन (EV) टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग में कितनी आगे निकल चुका है। विश्लेषकों का अनुमान है कि इस साल एक्सपोर्ट्स वॉल्यूम 20% या उससे भी ज्यादा बढ़ सकते हैं, जो डोमेस्टिक बिक्री की गिरावट की भरपाई कर सकते हैं।
घरेलू मंदी का असर
घरेलू बिक्री में आई लगातार गिरावट का सीधा असर एक्सपोर्ट्स की रफ्तार पर पड़ा है। सरकार द्वारा NEVs पर दिए जाने वाले खरीद इंसेंटिव्स में कमी और प्रॉपर्टी मार्केट में मंदी जैसे आर्थिक कारणों से लोग बड़ी खरीददारी से कतरा रहे हैं। चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन (CPCA) के मुताबिक, मार्च में डोमेस्टिक बिक्री 15.2% गिरी।
एक्सपोर्ट्स की भारी निर्भरता के जोखिम
इस एक्सपोर्ट बूम के साथ कुछ बड़े जोखिम भी जुड़े हैं। BYD जैसी कंपनियों को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में श्रम उल्लंघन जैसे आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ब्रांड इमेज पर असर पड़ सकता है। एक्सपोर्ट्स पर ज्यादा निर्भरता चीन की कंपनियों को संरक्षणवादी व्यापार नीतियों और भू-राजनीतिक तनाव के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाती है।
अगर व्यापारिक विवाद बढ़ते हैं, तो सप्लाई चेन और बाजार पहुंच में गंभीर बाधाएं आ सकती हैं। साथ ही, अगर डोमेस्टिक डिमांड में सुधार नहीं हुआ तो अतिरिक्त उत्पादन क्षमता (excess production capacity) की समस्या खड़ी हो सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव आएगा।
आगे की राह
विश्लेषकों को उम्मीद है कि साल के अंत तक एक्सपोर्ट्स वॉल्यूम में होने वाली कुल वृद्धि डोमेस्टिक मार्केट में आई कमी की भरपाई कर लेगी। BYD का फॉरवर्ड पी/ई रेश्यो करीब 17.97 और Geely Auto का 11.79 है, जो इन कंपनियों में निवेश की संभावनाओं को दर्शाते हैं। हालांकि, चीन के ऑटो उद्योग का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह वैश्विक बाजार में कितनी उत्पादन क्षमता को बिना किसी बड़े व्यापारिक विरोध के खपा पाता है।