गाड़ियों की सुरक्षा बढ़ेगी! कार निर्माता V2X तकनीक के लिए नियम बनाने की कर रहे हैं मांग

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AuthorNeha Patil|Published at:
गाड़ियों की सुरक्षा बढ़ेगी! कार निर्माता V2X तकनीक के लिए नियम बनाने की कर रहे हैं मांग

भारत की प्रमुख कार निर्माता कंपनियां, जिनमें Mercedes-Benz India और JSW MG Motor India शामिल हैं, 'व्हीकल-टू-एनीथिंग' (V2X) टेक्नोलॉजी को लेकर सरकार से स्पष्ट नियमों की मांग कर रही हैं। हाल ही में ऑटोमोटिव रडार के लिए कुछ स्पेक्ट्रम बैंड को डी-लाइसेंस किया गया है, लेकिन कंपनियां भारतीय बाजार में इन एडवांस्ड सुरक्षा फीचर्स को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए और आधिकारिक दिशानिर्देश चाहती हैं।

Detailed Coverage

V2X टेक्नोलॉजी: सुरक्षा का नया आयाम

भारत में कार निर्माता सरकार से 'व्हीकल-टू-एनीथिंग' (V2X) टेक्नोलॉजी के लिए नियामक नियमों को अंतिम रूप देने का आग्रह कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह एडवांस्ड रोड सेफ्टी और ऑटोनॉमस ड्राइविंग फीचर्स को अपनाने के लिए बेहद जरूरी है। V2X टेक्नोलॉजी गाड़ियों को दूसरी कारों, ट्रैफिक लाइटों और सड़क के इंफ्रास्ट्रक्चर से सीधे कम्युनिकेट करने की क्षमता देती है, जिससे एक्सीडेंट को रोकने और ट्रैफिक फ्लो को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

स्पेक्ट्रम मंजूरी से मिली राहत

टेलीकम्युनिकेशन विभाग ने पहले ही खास फ्रीक्वेंसी बैंड को डी-लाइसेंस करके एक बड़ी बाधा को दूर कर दिया है। हालिया गैजेट नोटिफिकेशन के ज़रिए, सरकार ने 5875-5905 MHz बैंड में सेलुलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग (C-V2X) कम्युनिकेशन को सक्षम किया है। यह फ्रीक्वेंसी उन कनेक्टिविटी सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है जो गाड़ियों को अपने आसपास को 'महसूस' करने की अनुमति देती हैं। इसके अलावा, 77–81 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड को शॉर्ट-रेंज ऑटोमोटिव रडार के लिए मंजूरी दी गई है, जो आधुनिक कोलिजन अवॉइडेंस और पार्किंग असिस्ट सिस्टम का एक बुनियादी हिस्सा है।

इंडस्ट्री का क्या है कहना?

ऑटोमेकर्स फिलहाल ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां टेक्नोलॉजी तो तैयार है, लेकिन रेगुलेटरी इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी विकसित हो रहा है। Mercedes-Benz India ने बताया है कि उनकी कुछ हाई-एंड गाड़ियां, जैसे S-Class, में पहले से ही V2X क्षमताएं मौजूद हैं। हालांकि, कंपनी नेतृत्व ने जोर देकर कहा कि भारत में अभी एक व्यापक फ्रेमवर्क की कमी है, जो इन फीचर्स के पूरी तरह से इस्तेमाल को रोकता है।

इसी तरह, JSW MG Motor India ने अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों, जैसे Windsor, में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट करना शुरू कर दिया है, ताकि रोड इमरजेंसी के दौरान अलर्ट भेजा जा सके। इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा उठाए गए शुरुआती कदम सकारात्मक हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन के लिए कार निर्माताओं, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, और टेलीकॉम ऑपरेटरों के बीच गहरी साझेदारी की आवश्यकता होगी।

सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

जैसे-जैसे गाड़ियां ज्यादा कनेक्टेड हो रही हैं, वैसे-वैसे साइबर सिक्योरिटी निवेशकों और निर्माताओं दोनों के लिए चर्चा का विषय बन गई है। इंडस्ट्री प्लेयर्स का कहना है कि वे वाहन प्रणालियों को डिजिटल कमजोरियों से बचाने के लिए स्थापित वैश्विक सम्मेलनों का पालन करते हैं। अब ध्यान सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय पर है, जिससे उम्मीद है कि यह इन टेक्नोलॉजी के कमर्शियल डिप्लॉयमेंट के लिए आवश्यक विशिष्ट दिशानिर्देश तैयार करेगा।

निवेशकों के लिए, तत्काल देखने वाली बात यह है कि सरकारी नियमों को कब अंतिम रूप दिया जाता है। जितनी तेजी से ये नियम बनाए जाएंगे, उतनी ही जल्दी कार निर्माता इन सिस्टम का परीक्षण करने से लेकर अपनी सभी कार मॉडलों में इन्हें स्टैंडर्ड सेफ्टी फीचर के रूप में पेश करने में सक्षम होंगे। ऑटोमोटिव फर्मों और टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं के बीच साझेदारी की निरंतर निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि एडवांस्ड V2X सिस्टम की डेटा आवश्यकताओं का समर्थन करने के लिए इन नेटवर्कों की आवश्यकता होती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.