CEAT ने इस तिमाही अपने टायरों की कीमतों में **4-6%** तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनी के मुनाफे में **40%** की भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके असर को कम करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
टायर बनाने वाली दिग्गज कंपनी CEAT ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग लागत को संतुलित करने के लिए टायरों की कीमतों में 4-6% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह फैसला मुख्य रूप से नेचुरल रबर और पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल की कीमतों में आई भारी तेजी के बाद लिया गया है।
मुनाफे पर दबाव और खराब नतीजे
सितंबर तिमाही के आंकड़ों पर नजर डालें, तो कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 26% बढ़कर ₹4,762 करोड़ रहा। हालांकि, सेल्स में यह मजबूती मुनाफे में नहीं बदली। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹186 करोड़ से घटकर ₹112 करोड़ रह गया। ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में भी 4% से ज्यादा की गिरावट आई है, जो घटकर 9.5% पर सिमट गया है।
रॉ मटीरियल की महंगाई का असर
कंपनी पर लागत का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। केवल दूसरी तिमाही में ही रॉ मटीरियल की लागत 8% बढ़ी है। अप्रैल से सितंबर के बीच रबर और ऑयल से जुड़ी इनपुट कॉस्ट में 24% का इजाफा हुआ है। मैनेजमेंट को आशंका है कि दिसंबर तक यह महंगाई मार्च के मुकाबले 27% तक पहुंच सकती है, जिसके चलते कीमतों को बढ़ाना मजबूरी बन गया है।
आगे की राह और चुनौतियां
कंपनी इस कीमत वृद्धि को दो स्तरों पर लागू करेगी। रिप्लेसमेंट मार्केट के लिए ये बदलाव तुरंत होंगे, जबकि ऑटो कंपनियों (OEMs) के साथ कीमतों का समायोजन तय समय-सारणी के अनुसार होगा। निवेशकों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद डिमांड बनी रहती है। अगर टायर बहुत ज्यादा महंगे होते हैं, तो ग्राहक खरीदारी टाल सकते हैं या दूसरी कंपनियों के विकल्प चुन सकते हैं। अब देखना यह है कि क्या कंपनी अपने मार्जिन को दोबारा पटरी पर ला पाती है या नहीं।
