CEAT Share Price: कंपनी के मुनाफे में 96% की भारी गिरावट, ₹4 करोड़ रहा नेट प्रॉफिट! जानिए आगे क्या?

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AuthorAditya Rao|Published at:
CEAT Share Price: कंपनी के मुनाफे में 96% की भारी गिरावट, ₹4 करोड़ रहा नेट प्रॉफिट! जानिए आगे क्या?

CEAT लिमिटेड ने पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट 96% गिरकर सिर्फ ₹4 करोड़ रह गया है, जिसका मुख्य कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के चलते मार्जिन पर पड़ा दबाव है। हालांकि, कंपनी के रेवेन्यू में 22% का उछाल देखा गया।

मार्जिन पर कच्चे माल की महंगाई का भारी दबाव

CEAT लिमिटेड को 2026-27 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में भारी झटका लगा है। जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की तुलना में 96.4% घटकर मात्र ₹4 करोड़ रह गया। यह गिरावट कंपनी के रेवेन्यू में 22.4% की ग्रोथ के बावजूद आई है, जो कि ₹4,318 करोड़ तक पहुंच गया।

कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि प्रॉफिट में इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं। खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते सप्लाई चेन बाधित हुई और कमोडिटी की कीमतों में तेजी आई। इसका सीधा असर कंपनी के EBITDA पर पड़ा, जो पिछले साल के ₹387 करोड़ से घटकर ₹365 करोड़ पर आ गया। नतीजतन, ऑपरेटिंग मार्जिन भी 11% से घटकर 8.5% पर आ गया। कंपनी ने लागत को मैनेज करने के लिए कीमतों में 5% की बढ़ोतरी की, लेकिन यह पूरी तरह से इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन को ऑफसेट करने में कामयाब नहीं रही।

₹1,205 करोड़ का बड़ा कैपेसिटी एक्सपेंशन प्लान

इन तात्कालिक चुनौतियों के बावजूद, CEAT ने लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ₹1,205 करोड़ के कैपिटल स्पेंडिंग प्लान के तहत अपने मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी में बड़ा इजाफा करेगी। इस विस्तार के बाद, फाइनेंशियल ईयर 2031 तक कंपनी की रोजाना 53,000 टायरों की प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ जाएगी।

यह विस्तार ऐसे समय में आ रहा है जब कंपनी पहले से ही अपनी मौजूदा 80,000 टायरों प्रतिदिन की कैपेसिटी का लगभग 95% इस्तेमाल कर रही है। सिर्फ जून तिमाही में ही कंपनी ने कैपेसिटी बढ़ाने के प्रोजेक्ट्स पर ₹300 करोड़ खर्च किए हैं।

आगे क्या उम्मीदें?

निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी कैसे महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं को उच्च लागत वाले माहौल में ऑपरेशनल एफिशिएंसी के साथ संतुलित करती है। मैनेजमेंट का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में भी कच्चे माल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। ऐसे में, कंपनी का फोकस अनुशासित प्राइसिंग और कॉस्ट कंट्रोल पर रहेगा। शेयरधारकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनी बढ़ती मांग के अनुरूप अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को कैसे बढ़ाती है और साथ ही अपने कैश फ्लो को कैसे मैनेज करती है।

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