CEAT लिमिटेड ने FY27 तक डबल-डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कंपनी टायर प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने में ₹1,205 करोड़ का निवेश करेगी। कंपनी डोमेस्टिक डिमांड में मजबूती देख रही है, लेकिन कच्चे माल की बढ़ती कीमतें मुनाफे पर असर डाल सकती हैं।
CEAT का बड़ा प्लान: FY27 तक डबल-डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य!
CEAT लिमिटेड आने वाले सालों में डबल-डिजिट ग्रोथ की राह पर चलने की तैयारी में है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी ने ₹1,205 करोड़ का भारी-भरकम निवेश करने का ऐलान किया है। इस पैसे का बड़ा हिस्सा नागपुर में टू-व्हीलर टायर बनाने वाली फैक्ट्री की कैपेसिटी बढ़ाने में लगाया जाएगा। कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) भी काफी अच्छा रहा है, पहली तिमाही में पिछले साल के मुकाबले 22% की बढ़त के साथ कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹4,318 करोड़ रहा।
डोमेस्टिक डिमांड और प्रोडक्शन बढ़ाने की तैयारी
कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि इस समय मार्केट का माहौल काफी पॉजिटिव है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। इस नए इन्वेस्टमेंट का मुख्य मकसद बढ़ती गाड़ियों की डिमांड को पूरा करना है। नई प्रोडक्शन लाइन्स शुरू होने के बाद, कंपनी डोमेस्टिक और इंटरनेशनल, दोनों मार्केट्स में अपनी सप्लाई को और बेहतर बना पाएगी। फिलहाल, कंपनी के पास लगभग 60 दिनों का ऑर्डर बुक है, जिससे प्रोडक्शन की प्लानिंग आसान हो जाती है।
कच्चे माल की कीमतें और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव
हालांकि, ग्रोथ की उम्मीदें अच्छी हैं, लेकिन कंपनी को कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है, जो टायर बनाने की लागत का एक बड़ा हिस्सा हैं। इस बढ़त को संभालने के लिए, कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें पहले ही बढ़ा दी हैं। उम्मीद है कि दूसरी तिमाही में भी ये कीमतें हाई बनी रहेंगी, जिससे नियर-टर्म में कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव रह सकता है। मैनेजमेंट का मानना है कि फाइनेंशियल ईयर के दूसरे हाफ (Half) में मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है, जब कीमतों का असर रॉ-मटेरियल (Raw Material) इनपुट्स के मुकाबले स्टेबल हो जाएगा।
इंटरनेशनल मार्केट्स में भी पैठ बनाने की कोशिश
CEAT अपनी ग्लोबल प्रेजेंस (Global Presence) को भी बढ़ाना चाहती है। वेस्ट एशिया (West Asia) मार्केट में कुछ दिक्कतें आने के बावजूद, जो कंपनी के इंटरनेशनल रेवेन्यू का लगभग 12% से 13% है, कंपनी ने कई ग्लोबल रीजन्स (Global Regions) में पैसेंजर व्हीकल (Passenger Vehicle), ट्रक (Truck) और ऑफ-हाईवे टायर्स (Off-highway Tires) के लिए नए ऑर्डर हासिल किए हैं। कंपनी इंटरनेशनल मार्केट्स में भी अपनी प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) बचाने के लिए कीमतों में धीरे-धीरे एडजस्टमेंट कर रही है।
निवेशकों को नागपुर प्लांट की कैपेसिटी की कमीशनिंग टाइमलाइन (Commissioning Timeline) और कस्टमर्स पर बढ़ती लागत का बोझ डालने की कंपनी की क्षमता पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, क्वार्टरली मार्जिन ट्रेंड्स (Quarterly Margin Trends) को देखना भी जरूरी होगा, ताकि यह पता चल सके कि कंपनी बढ़ती कमोडिटी कीमतों (Commodity Prices) के दबाव को कितनी अच्छी तरह मैनेज कर पा रही है।
