CEAT Limited ने अपने श्रीपेरंबुदूर प्लांट को अपग्रेड किया है ताकि **22-इंच** की अल्ट्रा-प्रीमियम SUV टायर और एडवांस्ड कमर्शियल रेडियल्स का निर्माण हो सके। कंपनी का लक्ष्य हाई-वैल्यू मार्केट पर कब्जा करना है, हालांकि बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट और बढ़ती रॉ मटेरियल कॉस्ट के बीच मुनाफे पर दबाव निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
उत्पादन में विस्तार और फाइनेंशियल तस्वीर
चेन्नई के श्रीपेरंबुदूर प्लांट में नई मैन्युफैक्चरिंग लाइनें शुरू की गई हैं। यह कदम कंपनी की पोर्टफोलियो को हाई-वैल्यू और टेक्नोलॉजिकल रूप से एडवांस्ड सेगमेंट की ओर ले जाने की कोशिश है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए भी टायर शामिल हैं। यह विस्तार जनवरी 2026 में मंजूर किए गए ₹1,314 करोड़ के बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान का हिस्सा है। कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2028 की पहली छमाही तक सालाना 3.5 मिलियन टायर की अतिरिक्त क्षमता हासिल करना है।
मुनाफे के मोर्चे पर चुनौती
भले ही लॉन्ग टर्म के लिए यह विस्तार एक पॉजिटिव कदम माना जा रहा है, लेकिन कंपनी के हालिया फाइनेंशियल नतीजे चुनौतियां भी दिखा रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू तो 22% बढ़ा, लेकिन नेट प्रॉफिट में गिरावट देखी गई। इसकी मुख्य वजह कच्चे माल (Raw Material) की बढ़ती कीमतें और Camso बिज़नेस के अधिग्रहण से जुड़े खर्च रहे हैं।
मार्जिन बचाने के लिए उठाए कदम
भू-राजनीतिक तनावों के कारण रॉ मटेरियल महंगा हुआ है, जिसे काउंटर करने के लिए कंपनी ने अगस्त 2026 तक कुल 7% तक कीमतों में इजाफा किया है। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या कंपनी अपनी कैपेसिटी एक्सपेंशन और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच सही संतुलन बना पाती है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
कंपनी का शेयर फिलहाल ₹3,220–₹3,230 के दायरे में ट्रेड कर रहा है। आने वाले क्वार्टर्स में यह देखना जरूरी होगा कि कंपनी अपनी डेट (Debt) को कैसे मैनेज करती है और क्या प्रीमियम टायर की बढ़ती मांग नई क्षमता का सही इस्तेमाल करने में मदद करती है। मार्जिन रिकवरी और मैनेजमेंट की कमेंट्री इस स्टॉक की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
