इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स का इंजन
ऑटोमोटिव सेक्टर एक ऐसे दौर के लिए तैयार है जहाँ यूनियन बजट 2026-27 ने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को ग्रोथ का मुख्य इंजन बनाया है। इससे व्हीकल सेगमेंट (Vehicle Segment) में डिमांड बढ़ने और मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी (Manufacturing Capacity) में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर Tata Motors और Uno Minda जैसी कंपनियों पर पड़ेगा।
सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) के तौर पर ₹12.2 लाख करोड़ आवंटित किए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा आउटले (Outlay) है। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए ₹1 लाख करोड़ का अतिरिक्त फंड भी सीधे तौर पर डिमांड बढ़ाने वाला है। Mercedes-Benz India के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, संतोष अय्यर का कहना है कि ऐतिहासिक तौर पर देखा गया है कि बेहतर हाईवे और शहरों के बीच कनेक्टिविटी से लग्जरी व्हीकल्स (Luxury Vehicles) की डिमांड बढ़ती है। सड़कों, फ्रेट कॉरिडोर (Freight Corridors) और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में सरकार का यह लगातार निवेश कमर्शियल व्हीकल्स (Commercial Vehicles), ट्रक्स, बसों की डिमांड को बढ़ाएगा और इकोनॉमिक एक्टिविटी (Economic Activity) बढ़ने के साथ पैसेंजर व्हीकल्स (Passenger Vehicles) की बिक्री में भी तेजी लाएगा। Tata Motors, जिसकी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalization) लगभग ₹1.64 लाख करोड़ और TTM P/E (Price to Earnings Ratio) करीब 20.6 है, जैसी स्थापित कंपनियों के लिए यह इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट एक मजबूत सपोर्ट का काम करेगा।
सप्लाई चेन को मज़बूती और EV को बढ़ावा
सिर्फ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ही नहीं, बजट में डोमेस्टिक वैल्यू चेन्स (Domestic Value Chains) को मज़बूत करने और मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता को बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग (Electronic Components Manufacturing) को सपोर्ट करने वाली स्कीम्स, प्रस्तावित इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (India Semiconductor Mission 2.0) और रेयर-अर्थ कॉरिडोर (Rare-earth Corridors) का डेवलपमेंट, खासकर तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट के लिए सप्लाई चेन को मज़बूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
Uno Minda, जो एक प्रमुख ऑटो कंपोनेंट निर्माता है और जिसकी मार्केट कैप लगभग ₹68,231 करोड़ और TTM P/E करीब 58.05 है, जैसी कंपनियां एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स पर इस फोकस से फायदा उठा सकती हैं। इसके अलावा, बजट में लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग (Lithium-ion Cell Manufacturing) के लिए कैपिटल गुड्स (Capital Goods) पर कस्टम ड्यूटी एग्जम्पशन (Custom Duty Exemption) जारी रखा गया है और लिथियम-आयन सेल पर कंसेशनल ड्यूटी (Concessional Duty) को भी बढ़ाया गया है। इसका मकसद EV बैटरी की लागत कम करना और डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा देना है। River Mobility के अरविंद मणि ने डोमेस्टिक मिनरल प्रोसेसिंग (Domestic Mineral Processing) के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि रेयर-अर्थ कॉरिडोर और केमिकल पार्क सीधे तौर पर बैटरी और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करते हैं। इन उपायों का लक्ष्य इंपोर्ट पर निर्भरता कम करना और भारत को एक आत्मनिर्भर EV मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की महत्वाकांक्षा को सपोर्ट करना है।
इंडस्ट्री का आउटलुक और एग्जीक्यूशन पर फोकस
इंडस्ट्री के एग्जीक्यूटिव्स (Executives) आम तौर पर बजट को देश के ग्रोथ एजेंडा (Growth Agenda) की एक स्ट्रेटेजिक कंटिन्युएशन (Strategic Continuation) के तौर पर देख रहे हैं, जो लॉन्ग-टर्म पॉलिसी स्टेबिलिटी (Long-term Policy Stability) पर ज़ोर देता है। SIAM के प्रेसिडेंट और Tata Motors Passenger Vehicles Ltd के MD & CEO, शैलेश चंद्रा ने इसे लॉन्ग-टर्म ग्रोथ ऑब्जेक्टिव्स (Long-term Growth Objectives) के अनुरूप बताया। जहाँ 4.3% डेफिसिट (Deficit) टारगेट को दर्शाने वाली फिस्कल प्रूडेंस (Fiscal Prudence) का स्वागत किया गया है, वहीं इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स (Stakeholders) यह भी मानते हैं कि प्रभावी एग्जीक्यूशन (Effective Execution) सबसे अहम होगा। Nawgati के वैभव कौशिक ने मोबिलिटी इकोसिस्टम (Mobility Ecosystem) को ऑप्टिमाइज़ (Optimise) करने के लिए इंप्लीमेंटेशन (Implementation) में स्पष्टता, कॉमन स्टैंडर्ड्स (Common Standards) और इंटरऑपरेबल डेटा सिस्टम्स (Interoperable Data Systems) के महत्व पर प्रकाश डाला। Uno Minda जैसी कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स के लिए, जिनका P/E लगभग 62.4 है, EV टेक्नोलॉजीज (EV Technologies) में R&D (Research and Development) में लगातार निवेश और अनुकूलन महत्वपूर्ण होगा। Mercedes-Benz Group AG, जिसका P/E लगभग 8.9 है, और Volvo AB, जिसका P/E करीब 19.9 है, भी बदलते मोबिलिटी डिमांड्स (Mobility Demands) और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों से लाभान्वित होने की स्थिति में हैं। इन बजटीय उपायों की सफलता सेक्टर की पूरी क्षमता को अनलॉक (Unlock) करने के लिए निर्बाध कार्यान्वयन (Seamless Implementation) पर निर्भर करेगी।