Bosch Limited के शेयर ने नया रिकॉर्ड बना लिया है। कंपनी की पहली तिमाही का रेवेन्यू **₹5,841.9 करोड़** पर पहुंच गया है, जो कि सालाना आधार पर **22%** की बढ़त है। हालांकि, नेट प्रॉफिट में गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
मुनाफे में गिरावट के पीछे का सच
अगर आप केवल कंपनी के नेट प्रॉफिट को देखेंगे, तो वह 36.7% गिरकर ₹706.1 करोड़ रह गया है। लेकिन रुकिए, यह कोई बिजनेस की कमजोरी नहीं है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹556 करोड़ का वन-टाइम गेन हुआ था, जिसकी वजह से बेस बहुत ऊंचा था। अगर हम इस वन-टाइम फैक्टर को हटा दें, तो कंपनी का कामकाज काफी मजबूत नजर आता है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 14.1% के आसपास स्थिर बना हुआ है।
नई रणनीतियां और एक्सपेंशन
Bosch अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए ₹115 करोड़ में Bosch Chassis Systems India का अधिग्रहण कर चुकी है, ताकि ब्रेकिंग और सेफ्टी पोर्टफोलियो को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, कंपनी ने Tata AutoComp Systems के साथ 50:50 की एक जॉइंट वेंचर डील की है। यह साझेदारी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) स्पेस में ई-एक्सल (e-axles) और इलेक्ट्रिक मोटर्स बनाने पर फोकस करेगी, जो कमर्शियल व्हीकल मार्केट के भविष्य के लिए बेहद अहम है।
वैल्यूएशन और रिस्क फैक्टर्स
मार्केट एनालिस्ट्स की मानें तो स्टॉक का मौजूदा वैल्यूएशन थोड़ा महंगा लग रहा है। स्टॉक अभी अपने FY28 की अनुमानित कमाई के 40 गुना से ज्यादा पर ट्रेड कर रहा है। इसी कारण कई ब्रोकरेज हाउस ने इसे लेकर 'न्यूट्रल' या 'कॉशस' रुख अपनाया है। निवेशकों को स्टील और एल्युमीनियम जैसे कच्चे माल की बढ़ती कीमतों पर भी नजर रखनी होगी, क्योंकि इनका असर आगे चलकर प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।
