Bharat Forge के शेयर सोमवार को **9%** तक गिर गए। कंपनी ने पहली तिमाही (FY27) में **₹90 करोड़** का नेट लॉस दर्ज किया है। रेवेन्यू तो बढ़ा, लेकिन जर्मन सब्सिडियरी के रीस्ट्रक्चरिंग का एक बड़ा वन-टाइम चार्ज मुनाफे पर भारी पड़ा।
क्यों आई Bharat Forge को भारी गिरावट?
Bharat Forge के निवेशकों के लिए सोमवार का दिन मायूसी भरा रहा। कंपनी के अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे उम्मीद से काफी खराब रहे, जिसके चलते शेयर में करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने इस तिमाही में ₹90 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस (Consolidated Net Loss) रिपोर्ट किया है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ₹284 करोड़ का मुनाफा (Profit) हुआ था।
मार्केट की उम्मीदों पर पानी
असल में, मार्केट इस नतीजे से हैरान है। एनालिस्ट्स (Analysts) को ₹349 करोड़ से ₹363 करोड़ के बीच मुनाफे की उम्मीद थी। इस भारी-भरकम घाटे की मुख्य वजह कंपनी की जर्मन सब्सिडियरी, Bharat Forge CDP GmbH के रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) पर आया ₹358 करोड़ का एक बड़ा वन-टाइम चार्ज (One-time Charge) है। इस नॉन-रिकरिंग खर्च (Non-recurring Expense) ने तिमाही नतीजों को बुरी तरह प्रभावित किया।
रेवेन्यू में ग्रोथ, मार्जिन पर दबाव
घाटे के बावजूद, कंपनी के कोर बिजनेस (Core Business) में अच्छी ग्रोथ दिखी। तिमाही रेवेन्यू (Revenue) 18.7% बढ़कर ₹4,640 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि, एनर्जी और इनपुट कॉस्ट (Input Costs) बढ़ने की वजह से ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन (Operating Profit Margin) पिछले साल के 17.4% से घटकर 16.2% पर आ गया। यह दिखाता है कि कंपनी को बढ़ती ग्लोबल कॉस्ट के बीच प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने में दिक्कतें आ रही हैं।
नए सेक्टर्स में बड़ी तैयारी
आगे की राह के लिए Bharat Forge ने नए सेक्टर्स में बड़ा दांव लगाने की तैयारी की है। कंपनी के बोर्ड ने ₹2,500 करोड़ तक फंड जुटाने की मंजूरी दे दी है। साथ ही, सेमीकंडक्टर (Semiconductor) और संबंधित क्षेत्रों में मौके तलाशने के लिए मलेशिया में एक नई सब्सिडियरी (Subsidiary) भी शुरू की जा रही है। मैनेजमेंट अगले 12 से 18 महीनों में ₹1,800 करोड़ का निवेश करके फोर्जिंग (Forging), मशीनिंग (Machining) और आंध्र प्रदेश में एक एनर्जेटिक्स प्लांट (Energetics Plant) तैयार करेगा।
डिफेंस ऑर्डर बुक मजबूत
कंपनी का डिफेंस सेगमेंट (Defense Segment) भी ग्रोथ का अहम हिस्सा बना हुआ है। 30 जून 2026 तक, डिफेंस ऑर्डर बुक ₹11,196 करोड़ पर पहुंच चुकी है। FY27 में भारतीय मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के लिए 20-25% ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, निवेशकों की नजरें अब इन बड़े कैपिटल-इंटेंसिव प्रोजेक्ट्स (Capital-intensive Projects) के एग्जीक्यूशन (Execution) और इंटरनेशनल सब्सिडियरीज के टर्नअराउंड (Turnaround) पर टिकी रहेंगी। आने वाले समय में ग्लोबल रीस्ट्रक्चरिंग कॉस्ट की वोलेटिलिटी (Volatility), इनपुट कॉस्ट का दबाव और नए सेक्टर्स में भारी निवेश का एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) मुख्य चिंताएं रहेंगी।
