Benara Bearings का बुरा हाल, ऑडिटर ने भी जताई चिंता
Benara Bearings & Pistons Ltd. ने 31 मार्च, 2025 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए कंपनी के बेहद कमजोर वित्तीय नतीजों का खुलासा किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड सालाना रेवेन्यू पिछले साल के ₹1,550.45 लाख की तुलना में 28.61% घटकर ₹1,106.88 लाख (यानी ₹11.07 करोड़) रह गया। वहीं, कंपनी का नेट लॉस पिछले साल के ₹317.32 लाख से बढ़कर ₹2,815.50 लाख (लगभग ₹28.16 करोड़) पर पहुंच गया। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट लॉस ₹2,748.22 लाख (यानी ₹27.48 करोड़) दर्ज किया गया, जो चिंता का विषय है। कुल खर्चे ₹2,878.07 लाख रहे, जो रेवेन्यू से काफी ज्यादा थे।
ऑडिटर का 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' क्या कहता है?
इस मामले में एक गंभीर मोड़ तब आया जब कंपनी के ऑडिटर, अग्रवाल जैन एंड गुप्ता, ने वित्तीय नतीजों पर 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' (Disclaimer of Opinion) जारी किया। इसका मतलब है कि ऑडिटर कंपनी के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों, जैसे कि फिजिकल इन्वेंटरी (₹1,849.75 लाख), नॉन-करंट एसेट्स की रिकवरी (₹979.02 लाख), और लॉन्ग-टर्म लोन व एडवांसेज (₹1,171.25 लाख) के बारे में पर्याप्त और भरोसेमंद जानकारी हासिल नहीं कर सके।
गोइंग कंसर्न और NPA का खतरा
ऑडिटर ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) यानी भविष्य में संचालन जारी रखने की क्षमता पर भी संदेह जताया है। कैश लॉसेस और निगेटिव नेट वर्थ के चलते कंपनी की भविष्य में संचालन जारी रखने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा, बैंकों से लिए गए ₹5,167.61 लाख के शॉर्ट-टर्म बोरिंग्स को डिफॉल्ट के कारण नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) घोषित कर दिया गया है। यह स्थिति कंपनी के गंभीर वित्तीय संकट और लिक्विडिटी की भारी कमी को दर्शाती है।
पिछली चुनौतियां और आगे का रास्ता
Benara Bearings का इतिहास वित्तीय चुनौतियों से भरा रहा है। कंपनी पर कर्ज चुकाने में देरी के कारण लोन NPA बन गए। मार्च 2026 में, कंपनी ने एक्सिस बैंक और बंधन बैंक के साथ ₹57.58 करोड़ के बकाया के बदले ₹30 करोड़ का वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) किया था। कंपनी रेगुलेटरी नियमों का पालन न करने के लिए BSE से जुर्माना भी झेल चुकी है। ऑडिटर की रिपोर्ट और गोइंग कंसर्न पर संदेह निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका है, जिससे कंपनी के शेयर के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।