Bajaj Auto, TVS Motor में आई तेज़ी! ब्रोकरेज का 2-व्हीलर कंपनियों पर भरोसा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Bajaj Auto, TVS Motor में आई तेज़ी! ब्रोकरेज का 2-व्हीलर कंपनियों पर भरोसा

घरेलू शेयर बाज़ार में आज ऑटो सेक्टर में अच्छी हलचल देखने को मिली, खासकर 2-व्हीलर बनाने वाली कंपनियों में। Bajaj Auto और TVS Motor के शेयरों में **2%** से ज़्यादा की तेज़ी आई है। ऐसा Kotak Institutional Equities की तरफ से जून तिमाही (Q1) के लिए आए पॉजिटिव आउटलुक के बाद हुआ है।

नतीजों का अनुमान और तेज़ी के कारण

Kotak Institutional Equities की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में 2-व्हीलर कंपनियों के नतीजे शानदार रहने की उम्मीद है। ब्रोकरेज हाउस का अनुमान है कि उनके कवरेज में शामिल ऑटो कंपनियां रेवेन्यू में साल-दर-साल 17% की ग्रोथ दिखा सकती हैं।

खासतौर पर, 2-व्हीलर कंपनियों के मुनाफे (Profitability) में ज़बरदस्त उछाल की उम्मीद है। Bajaj Auto का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले का मुनाफा) पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में 40% बढ़ने का अनुमान है। वहीं, TVS Motor के EBITDA में 32% की बढ़ोतरी हो सकती है। Eicher Motors और Maruti Suzuki जैसी कंपनियों में भी ग्रोथ की उम्मीद है, हालांकि यह 27% और 7% जैसी मामूली रहेगी, जो अलग-अलग व्हीकल सेगमेंट में मिले-जुले रुझान को दर्शाती है।

सेक्टर पर दबाव और मार्जिन का रिस्क

जहां 2-व्हीलर सेक्टर में तेज़ी की उम्मीद है, वहीं रिपोर्ट ने ऑटो इंडस्ट्री के दूसरे हिस्सों के लिए चिंता जताई है। Apollo Tyres, CEAT और MRF जैसी टायर कंपनियों पर मार्जिन का दबाव बढ़ सकता है। इसकी वजह है प्राकृतिक रबर और कच्चे तेल से जुड़े मटेरियल की बढ़ती कीमतें। निवेशकों को नज़र रखनी होगी कि क्या ये कंपनियां बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डाल पाएंगी या उनका मुनाफा (Profit) कम रहेगा।

इसी तरह, कुछ पैसेंजर व्हीकल बनाने वाली कंपनियों के लिए भी ब्रोकरेज ने जोखिम की ओर इशारा किया है। Hyundai Motor India के EBITDA में साल-दर-साल 31% की गिरावट का अनुमान है। Jaguar Land Rover भी बढ़ते कच्चे माल, ऑपरेटिंग डी-लिवरेज और खराब फॉरेन एक्सचेंज की वजह से EBITDA में 32% की गिरावट झेल सकती है।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

आगे चलकर, इंडस्ट्री में मुनाफे के मार्जिन (Profit Margins) में सुधार एक अहम फैक्टर होगा। ब्रोकरेज का मानना है कि मार्जिन में राहत सितंबर तिमाही से शुरू हो सकती है, जो रबर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी पर निर्भर करेगा। जैसे-जैसे नतीजों का सीजन आगे बढ़ेगा, निवेशक मैनेजमेंट से 2-व्हीलर्स की रूरल डिमांड की स्थिरता और टायर व पैसेंजर व्हीकल कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर कमोडिटी की कीमतों की वोलेटिलिटी के असर पर कमेंट्री पर ध्यान देंगे।

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