भारत के टू-व्हीलर एक्सपोर्ट में जून तिमाही के दौरान शानदार रिकवरी देखने को मिली है। कुल एक्सपोर्ट **1.5 मिलियन** यूनिट्स तक पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग **37%** ज्यादा है। इस उछाल में Bajaj Auto और TVS Motor का बड़ा योगदान रहा।
Detailed Coverage
एक्सपोर्ट में आई बहार, क्यों?
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के मुताबिक, इस तिमाही में कुल 1.5 मिलियन टू-व्हीलर्स एक्सपोर्ट हुए, जो पिछले साल के मुकाबले 37% का इजाफा है। यह रिकवरी इसलिए भी अहम है क्योंकि यह उन चुनौतियों से उबरने का संकेत देती है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY24 और FY25) में अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी बाजारों में फॉरेन एक्सचेंज की कमी और राजनीतिक अस्थिरता के चलते टू-व्हीलर सेक्टर पर हावी थीं।
Bajaj Auto की दमदार वापसी
Bajaj Auto एक्सपोर्ट को रफ्तार देने में सबसे आगे रही। कंपनी ने जून तिमाही में 636,005 टू-व्हीलर्स एक्सपोर्ट किए, जो उसके डोमेस्टिक सेल्स 586,547 यूनिट्स से भी ज्यादा है। यह पिछले साल के बिल्कुल उलट है, जब डोमेस्टिक डिमांड एक्सपोर्ट से कहीं ज्यादा थी। इस ग्रोथ का एक बड़ा कारण नाइजीरिया जैसे बाजारों में डिमांड का सुधरना है, जहां कंपनी की Boxer Heavy Duty मोटरसाइकिल काफी लोकप्रिय है। साथ ही, भारत से KTM ब्रांड की मोटरसाइकिलों का एक्सपोर्ट भी बढ़ा है। मैनेजमेंट का कहना है कि वे एक्सपोर्ट वॉल्यूम को 250,000 यूनिट प्रति माह से ऊपर ले जाने का लक्ष्य रखते हैं और इस रफ्तार को फाइनेंशियल ईयर 2027 के अंत तक बनाए रखना चाहते हैं।
TVS Motor और इंडस्ट्री का प्रदर्शन
TVS Motor Company ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने 419,737 यूनिट्स की बिक्री विदेशी बाजारों में दर्ज की, जो पिछले साल की तुलना में 66% की ग्रोथ है। Bajaj Auto के साथ मिलकर, इन दोनों कंपनियों का भारत के कुल टू-व्हीलर एक्सपोर्ट में लगभग दो-तिहाई हिस्सा है। Hero MotoCorp, Honda Motorcycle & Scooter India, और Suzuki Motorcycle India जैसी दूसरी बड़ी कंपनियों ने भी एक्सपोर्ट शिपमेंट्स में योगदान दिया है।
आगे क्या देखें?
हालांकि मौजूदा एक्सपोर्ट उछाल सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को यह देखना होगा कि अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों में डिमांड कितनी स्थिर रहती है और इसका भविष्य के प्रॉफिट मार्जिन पर क्या असर पड़ता है। इस सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी काफी हद तक इन क्षेत्रों में करेंसी के उतार-चढ़ाव और लोकल इंपोर्ट पॉलिसी की स्थिरता पर निर्भर करती है। इसके अलावा, भले ही डोमेस्टिक मार्केट को फेवरेबल टैक्स पॉलिसी का सहारा मिला है, लेकिन टू-व्हीलर इंडस्ट्री का ओवरऑल हेल्थ ग्लोबल शिपिंग कॉस्ट और सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स को मैनेज करने की कंपनियों की क्षमता पर भी टिका है। यह देखना अहम होगा कि आने वाले महीनों में कंपनियां अपने अंतरराष्ट्रीय फुटप्रिंट को बढ़ाने के साथ-साथ इन एक्सपोर्ट वॉल्यूम को बनाए रख पाती हैं या नहीं।
