Bajaj Auto ने FY2026 में घरेलू मोटरसाइकिल मार्केट में **15.6%** तक गिरे मार्केट शेयर के बाद अपनी रणनीति बदल दी है। कंपनी अब प्रीमियम मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और व्हीकल फाइनेंसिंग पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि मास-मार्केट की उठापटक पर निर्भरता कम हो सके।
बदली रणनीति, क्यों?
Bajaj Auto ने FY2026 और उसके बाद के लिए एक नई स्ट्रेटेजी (strategy) तैयार की है, जिसका मकसद घरेलू मोटरसाइकिल की बिक्री पर निर्भरता कम करना है। कंपनी के चेयरमैन नीरज बजाज ने शेयरहोल्डर्स को बताया है कि अब कंपनी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, प्रीमियम मोटरसाइकिल सेगमेंट और इंटरनेशनल मार्केट्स की ओर बड़ा कदम उठाएगी। यह बदलाव इसलिए ज़रूरी हो गया है क्योंकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में भारत में कंपनी का डोमेस्टिक मोटरसाइकिल मार्केट शेयर घटकर 15.6% रह गया था, और कॉम्पिटिशन (competition) काफी बढ़ गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए, कंपनी अब 125cc से ऊपर की मोटरसाइकिल कैटेगरी पर फोकस कर रही है, क्योंकि इस सेगमेंट में मार्जिन (margin) बेहतर रहता है।
प्रीमियम और इलेक्ट्रिक पर दांव
कंपनी की स्ट्रेटेजी मास-मार्केट सेगमेंट से हटकर डाइवर्सिफाई (diversify) करने पर आधारित है, जो काफी साइक्लिकल (cyclical) होता है। इस प्लान का एक बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाना है। इसमें Chetak इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री बढ़ाना, Riki ई-रिक्शा ब्रांड को स्केल करना और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर रेंज की प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) को बेहतर बनाना शामिल है। EV के अलावा, कंपनी KTM में अपने स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट (investment) का फायदा उठाकर प्रीमियम मोटरसाइकिल पोर्टफोलियो को मजबूत कर रही है। हायर-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ओर बढ़कर, Bajaj Auto एंट्री-लेवल मोटरसाइकिल सेगमेंट में दिख रही वॉल्यूम-ड्रिवन (volume-driven) कॉम्पिटिशन का मुकाबला करने का लक्ष्य रख रही है।
फाइनेंसिंग बना सहारा
जहां मोटरसाइकिल की बिक्री में उतार-चढ़ाव आता रहता है, वहीं Bajaj Auto का फाइनेंसिंग आर्म, Bajaj Auto Credit, बिजनेस के लिए एक अहम स्टेबललाइजर (stabilizer) बनकर उभरा है। FY2026 में इस डिविजन ने ₹18,835 करोड़ का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (Assets Under Management) रिपोर्ट किया, जिसे 23% के रिटर्न ऑन इक्विटी (Return on Equity) का सपोर्ट मिला। यह फाइनेंसिंग बिजनेस कस्टमर एंगेजमेंट (engagement) का एक महत्वपूर्ण जरिया है, जो आसान क्रेडिट की सुविधा देकर व्हीकल की बिक्री सुनिश्चित करने में मदद करता है। निवेशकों के लिए, यह आर्म टू-व्हीलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वोलेटाइल (volatile) प्रकृति के खिलाफ एक बफर (buffer) प्रदान करता है, क्योंकि यह इंटरेस्ट (interest) और सर्विस फीस से लगातार आय उत्पन्न करता है।
कॉम्पिटिशन और सप्लाई चेन के रिस्क
यह समझना ज़रूरी है कि Bajaj Auto अकेले मैदान में नहीं है। भारत में कॉम्पिटिशन काफी बढ़ गया है। TVS Motor और Hero MotoCorp जैसी कंपनियाँ भी प्रीमियम और इलेक्ट्रिक सेगमेंट में तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बढ़ती मांग ने Ola Electric जैसे नए खिलाड़ियों को भी मैदान में ला खड़ा किया है, जिससे मार्केट शेयर पर दबाव बढ़ रहा है। सप्लाई चेन की मजबूती एक प्रमुख ऑपरेशनल रिस्क बनी हुई है; हाल ही में रेयर-अर्थ मैग्नेट (rare-earth magnets) की कमी ने इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) की कमजोरियों को उजागर किया था। कंपनी अब इलेक्ट्रिक मोटर्स को रीडिज़ाइन (redesign) करने और भविष्य में ऐसे व्यवधानों को कम करने के लिए सोर्सिंग (sourcing) में विविधता लाने पर काम कर रही है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आगे चलकर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 125cc-प्लस प्रीमियम सेगमेंट घरेलू मार्केट शेयर में हुई गिरावट को रिकवर (recover) करने के लिए पर्याप्त वॉल्यूम उत्पन्न कर पाता है या नहीं। निवेशक कंपनी की उस क्षमता पर नज़र रख सकते हैं कि वह EV क्षमता और मार्केटिंग में भारी खर्च करते हुए स्वस्थ ऑपरेटिंग मार्जिन (operating margin) बनाए रखने में कैसे कामयाब होती है। इसके अलावा, Riki ई-रिक्शा की सफलता और Chetak की स्केलिंग (scaling) कंपनी की इलेक्ट्रिक स्पेस में प्रगति के महत्वपूर्ण संकेतक होंगे। इस स्ट्रेटेजी की सफलता का अंतिम माप यह होगा कि कंपनी स्थापित प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ अपनी स्थिति का बचाव करने के साथ-साथ अधिक प्रीमियम और इलेक्ट्रिक-केंद्रित प्रोडक्ट मिक्स में सफलतापूर्वक ट्रांज़िशन (transition) का प्रबंधन कर पाती है या नहीं।
