वाह! Bajaj Auto के लिए अप्रैल-जून की तिमाही (FY27) ज़बरदस्त रही। कंपनी ने **₹2,983 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले **42%** ज़्यादा है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू **37%** बढ़कर **₹17,244 करोड़** तक पहुँच गया। इसकी बड़ी वजह कंपनी का रिकॉर्ड एक्सपोर्ट और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) की बढ़ती डिमांड रही।
Detailed Coverage
कंपनी की अब तक की सबसे बेहतरीन तिमाही!
Bajaj Auto Ltd. ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में अपने इतिहास की सबसे शानदार परफॉरमेंस दी है। कंपनी ने ₹2,983 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट कमाया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 42% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी है। यही नहीं, कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में भी 37% का बड़ा उछाल देखने को मिला और यह ₹17,244 करोड़ पर जा पहुंचा।
मार्जिन में सुधार और एक्सपोर्ट का कमाल
इस तिमाही में कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन भी सुधरे हैं और 20.9% पर पहुंच गए, जबकि पिछले साल की पहली तिमाही में यह 19.7% थे। इस मुनाफे का एक बड़ा श्रेय कंपनी के इंटरनेशनल बिज़नेस को जाता है, जहाँ एक्सपोर्ट वॉल्यूम में 54% का ज़बरदस्त इजाफा हुआ और यह 7.32 लाख यूनिट तक पहुँच गए। यह पहली बार है जब कंपनी ने एक तिमाही में 7 लाख यूनिट से ज़्यादा का एक्सपोर्ट किया है। अफ्रीका में डिमांड का लौटना और लैटिन अमेरिका में लगातार ग्रोथ ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और प्रीमियम बाइक्स का जलवा
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) अब कंपनी के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा बन गए हैं, जो डोमेस्टिक बिज़नेस का लगभग 30% है। Chetak इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री ने इस तिमाही में रिकॉर्ड तोड़ दिए, हालांकि कंपनी अभी भी प्रोडक्शन कैपेसिटी से जुड़ी सप्लाई की दिक्कतों से जूझ रही है। वहीं, थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी बड़ा बदलाव आया है, जहाँ अब पारंपरिक इंजन वाले व्हीकल्स के मुकाबले इलेक्ट्रिक मॉडल्स की बिक्री करीब दो-तिहाई हो गई है। प्रीमियम सेगमेंट में KTM और Triumph के साथ पार्टनरशिप भी रंग ला रही है, जिससे इन ब्रांड्स की भारतीय बाज़ार में सेल्स 60% बढ़ी है।
मजबूत फाइनेंशियल पोजीशन और भविष्य की रणनीति
Bajaj Auto के पास मजबूत बैलेंस शीट है, और तिमाही के अंत में कंपनी के पास ₹21,000 करोड़ से ज़्यादा का सरप्लस फंड था। इस तिमाही में कंपनी ने ₹2,300 करोड़ से ज़्यादा का कैश जेनरेट किया है, जिससे भविष्य में कैपिटल एक्सपेंडिचर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए काफी फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।
हालांकि, कंपनी की यह दमदार परफॉरमेंस जारी रहेगी, लेकिन इन्वेस्टर्स इस पर नज़र रखेंगे कि मैनेजमेंट इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की प्रोडक्शन कैपेसिटी को कैसे संभालता है, क्योंकि सप्लाई की कमी के चलते डिमांड पूरी करने में मुश्किलें आती रही हैं। इसके अलावा, एक्सपोर्ट में यह बढ़त कितनी टिकाऊ है, यह देखना होगा, जो कि इंटरनेशनल मार्केट्स की भू-राजनीतिक और लॉजिस्टिकल उठा-पटक पर निर्भर करेगा। साथ ही, कंपनी के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वह अपने पारंपरिक मोटरसाइकिल बिज़नेस की ग्रोथ और इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो को बढ़ाने के बीच ऑपरेटिंग मार्जिन को कैसे बनाए रखती है।
