प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी Bajaj Auto अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) विस्तार की योजनाओं पर पुनर्विचार कर रही है। कंपनी महाराष्ट्र के बजाय अन्य राज्यों में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के विकल्प तलाश रही है, जिसकी मुख्य वजह राज्य सरकार से सब्सिडी भुगतान में हो रही देरी और इंसेंटिव सर्टिफिकेट मिलने में आनाकानी है।
क्या है पूरा मामला?
Bajaj Auto ने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए FY22 के अपने लगभग 60% सब्सिडी क्लेम का भुगतान अभी तक नहीं पाया है। कंपनी ने ग्राहकों को सब्सिडी का लाभ तो पहुँचा दिया है, लेकिन सरकार से यह पैसा अभी तक वापस नहीं मिला है। इसका सीधा असर कंपनी के वर्किंग कैपिटल पर पड़ रहा है।
सिर्फ सब्सिडी ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल इंसेंटिव के लिए पैकेज स्कीम ऑफ इंसेंटिव (PSI) के तहत एलीजिबिलिटी सर्टिफिकेट मिलने में भी देरी हो रही है। कुछ सर्टिफिकेट तो 18 महीने से अटके पड़े हैं। इन सर्टिफिकेट्स के बिना कंपनी के लिए नए निवेश और कैपिटल एलोकेशन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
महाराष्ट्र से बाहर जाने की नौबत क्यों?
सूत्रों के मुताबिक, कंपनी तमिलनाडु जैसे राज्यों को एक प्रमुख विकल्प के तौर पर देख रही है। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार के साथ भुगतान को लेकर चल रहा गतिरोध, कंपनी के ₹2,000 करोड़ के निवेश प्लान पर सवाल खड़े कर रहा है। ये निवेश चाकन, आकुर्डी और वालुज में प्रीमियम बाइक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए किया जाना था।
जब राज्य सरकारें वादे के मुताबिक इंसेंटिव नहीं देतीं, तो कंपनियों को उस क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने की लाभप्रदता (profitability) पर फिर से विचार करना पड़ता है। ऐसे में, भविष्य के कैपिटल खर्च (capex) को ऐसे राज्यों की ओर मोड़ने की संभावना बढ़ जाती है, जहाँ बिज़नेस के लिए माहौल ज़्यादा अनुकूल हो और इंसेंटिव्स का भुगतान समय पर हो।
सेक्टर और पॉलिसी का संदर्भ
भारत में EV इंडस्ट्री सरकारी नीतियों पर बहुत निर्भर करती है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों ने 2021 में मैन्युफैक्चरिंग और एडॉप्शन को बढ़ावा देने के लिए आक्रामक EV नीतियां पेश की थीं। हालांकि, जमीनी हकीकत में बजट की कमी के कारण इंसेंटिव भुगतान में देरी जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
Bajaj Auto अकेले ऐसी कंपनी नहीं है जो इन प्रशासनिक बाधाओं से जूझ रही है। कई निर्माता ऐसे सेक्टर में काम करते हैं जहाँ ग्राहकों के लिए कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए उन्हें सरकारी सहायता पर निर्भर रहना पड़ता है। जब राज्य समय पर सब्सिडी का भुगतान करने में विफल रहते हैं, तो कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव पड़ता है, भले ही मुख्य व्यवसाय मजबूत हो।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को कंपनी के भविष्य के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) प्लान्स पर नजर रखनी चाहिए। खासकर, नई कैपेसिटी किस राज्य में लगाई जाएगी, इस पर अपडेट महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, FY22 की सब्सिडी क्लेम्स की रिकवरी और PSI सर्टिफिकेट्स जारी होने की खबरों पर भी नज़र रखनी होगी।
