Bajaj Auto: महाराष्ट्र EV Policy की नाकामी, कंपनी का बड़ा फैसला - प्लांट शिफ्ट करने की तैयारी!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Bajaj Auto: महाराष्ट्र EV Policy की नाकामी, कंपनी का बड़ा फैसला - प्लांट शिफ्ट करने की तैयारी!
Overview

Bajaj Auto अपने Chetak इलेक्ट्रिक स्कूटर के लिए महाराष्ट्र से बाहर नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की ओर देख रही है। कंपनी का आरोप है कि राज्य सरकार EV पॉलिसी के तहत किए गए वादों को पूरा नहीं कर रही है और सब्सिडी का भुगतान भी अटका हुआ है। एमडी राजीव बजाज ने महाराष्ट्र की EV पॉलिसी को 'नाकाम' करार दिया है।

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Bajaj Auto अपने लोकप्रिय Chetak इलेक्ट्रिक स्कूटर के उत्पादन के लिए महाराष्ट्र से बाहर एक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने पर विचार कर रही है। इस कदम की मुख्य वजह राज्य सरकार की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी को लेकर पैदा हुए विवाद और वादे के मुताबिक सब्सिडी का भुगतान न होना है। कंपनी का कहना है कि उसे अब तक केवल ₹60 करोड़ से भी कम की सब्सिडी मिली है, जबकि कुल बकाया राशि काफी बड़ी है।

महाराष्ट्र की EV पॉलिसी फिलहाल भारी आलोचना का सामना कर रही है। Bajaj Auto वर्तमान में पुणे के अकुर्दी प्लांट में अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाती है। लेकिन, राज्य सरकार द्वारा EV पॉलिसी की शर्तों का पालन न करने को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। यह समस्या सिर्फ Bajaj Auto तक सीमित नहीं है; फाइनेंशियल ईयर 2021-22 से राज्य में ₹3,000 करोड़ से अधिक की EV सब्सिडी का भुगतान अभी बाकी है, जो कई मैन्युफैक्चरर्स को प्रभावित कर रहा है। इस अनिश्चितता के कारण कंपनियां लंबी अवधि के इनवेस्टमेंट पर पुनर्विचार कर रही हैं।

जहां Bajaj Auto महाराष्ट्र से बाहर निकलने पर विचार कर रही है, वहीं उसके प्रतिद्वंद्वी इस क्षेत्र में विस्तार कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, Ather Energy महाराष्ट्र के औरंगाबाद में ₹2,000 करोड़ तक का तीसरा प्लांट लगाने की योजना बना रही है। दूसरी ओर, Ola Electric भी अपनी बाजार हिस्सेदारी घटने, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों में कमी और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) समय-सीमा चूकने जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में, उत्तराखंड अपनी EV पॉलिसी 2019 और आगामी 2025 फ्रेमवर्क के साथ, तो वहीं तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्य बड़े कैपिटल सब्सिडी और टैक्स छूट देकर EV मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रहे हैं।

Bajaj Auto के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज ने महाराष्ट्र सरकार की EV पॉलिसी को अपने 36 साल के करियर की 'सबसे बड़ी नाकामी' (massive failure) और 'पॉलिसी फेलियर' बताया है। अकेले Bajaj Auto के लिए लगभग ₹100 करोड़ की बकाया सब्सिडी कंपनी के लिए बड़ा वित्तीय जोखिम पैदा करती है और निवेशकों का भरोसा भी कम करती है। यह स्थिति राज्य-स्तरीय EV इंसेंटिव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। ₹2.62 ट्रिलियन के मार्केट कैपिटलाइजेशन और लगभग 28-30 के P/E रेशियो वाली कंपनी के लिए, इस तरह की पॉलिसी अस्थिरता रणनीतिक योजना और पूंजी आवंटन को प्रभावित करती है।

Bajaj Auto अपनी नई EV प्लांट की लोकेशन को जून तक फाइनल करने की योजना बना रही है। कंपनी अपने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर आउटपुट को स्थिर करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसका टारगेट अप्रैल तक 40,000 यूनिट प्रति माह है। यह संभावित कदम महाराष्ट्र से EV मैन्युफैक्चरिंग को दूर ले जाकर, भारत के इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में निरंतर विकास के लिए रेगुलेटरी स्थिरता और सरकारी नीतियों के समय पर कार्यान्वयन के महत्व को रेखांकित करता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.