BMW India EV Sales: इलेक्ट्रिक कारों का जलवा! डीजल को पछाड़ा, 2030 तक 40% शेयर का लक्ष्य

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AuthorMehul Desai|Published at:
BMW India EV Sales: इलेक्ट्रिक कारों का जलवा! डीजल को पछाड़ा, 2030 तक 40% शेयर का लक्ष्य

BMW Group India ने बड़ी घोषणा करते हुए बताया है कि उनकी कुल बिक्री में अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की हिस्सेदारी **26%** पहुंच गई है, जो डीजल वाहनों के **16%** शेयर से कहीं ज़्यादा है। कंपनी का लक्ष्य **2030** तक यह आंकड़ा **40%** तक ले जाने का है।

इलेक्ट्रिक का बढ़ा क्रेज़, लंबी दूरी के सफर का बना सहारा

BMW Group India में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है। अब लंबी दूरी की यात्राओं के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) पहली पसंद बनती जा रही हैं। BMW Group India के प्रेसिडेंट और CEO, हरदीप सिंह ब्रार के मुताबिक, कंपनी की इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री ने 2026 के पहले हाफ में डीजल इंजन वाली कारों को पीछे छोड़ दिया है। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहन अब कुल बिक्री का 26% हिस्सा हैं, जबकि डीजल की हिस्सेदारी घटकर 16% रह गई है।

आखिर क्यों बदल रही है लोगों की पसंद?

इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं, जिनमें बेहतर टेक्नोलॉजी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास प्रमुख है। नई इलेक्ट्रिक कारों की रेंज काफी बढ़ गई है, जो पहले हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय थी। भारत में हाईवे पर चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछने से अब लग्जरी कार खरीदार शहरों के बीच यात्रा के लिए भी इलेक्ट्रिक पावर पर भरोसा कर रहे हैं। ब्रार ने यह भी बताया कि इलेक्ट्रिक और पेट्रोल/डीजल कारों के बीच कीमत का अंतर भी कम हो रहा है, जिससे ग्राहकों के लिए इलेक्ट्रिक कार खरीदना अब ज़्यादा किफ़ायती साबित हो रहा है।

BMW India की ग्रोथ और भविष्य की प्लानिंग

BMW India ने 2026 की पहली छमाही में कुल 9,075 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल के मुकाबले 17% ज़्यादा है। फिलहाल पेट्रोल गाड़ियां 58% बिक्री के साथ अभी भी सबसे ज़्यादा पसंद की जाने वाली कारें हैं, लेकिन कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक रेंज को तेजी से बढ़ा रही है। BMW आने वाले सालों में अपनी पूरी प्रोडक्ट लाइनअप में इलेक्ट्रिक वेरिएंट्स पेश करने की योजना बना रही है।

हालांकि, कंपनी अभी प्रोडक्शन की समस्या से जूझ रही है। मौजूदा बुकिंग में लगभग 30% इलेक्ट्रिक मॉडल्स की है, जिस वजह से मांग सप्लाई से ज़्यादा हो गई है। इससे कुछ मॉडल्स के लिए 2 से 3 महीने तक का वेटिंग पीरियड चल रहा है। कंपनी को उम्मीद है कि यह रफ़्तार बनी रहेगी और 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहन उनकी कुल सालाना बिक्री का 40% हिस्सा बन जाएंगे।

बाज़ार का हाल और जोखिम

निवेशकों को लग्जरी कार बाज़ार में डीजल से इलेक्ट्रिक की ओर हो रहे इस बदलाव पर नज़र रखनी चाहिए, जो भारत में ज़्यादा माइलेज चाहने वालों की पहली पसंद रहा है। भले ही इलेक्ट्रिक कारों की ओर बढ़ना ग्लोबल ट्रेंड और सरकारी प्रोत्साहनों के अनुरूप है, लेकिन कंपनी की सफलता उत्पादन क्षमता को प्रबंधित करने और मौजूदा वेटिंग पीरियड को कम करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगी। साथ ही, ज़्यादा इलेक्ट्रिक वेरिएंट्स जोड़ने के साथ-साथ, बैटरी टेक्नोलॉजी और चार्जिंग नेटवर्क के लिए ज़रूरी शुरुआती भारी पूंजी निवेश को मैनेज करने की क्षमता कंपनी की ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डालेगी।

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