इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली कंपनी BGauss, तमिलनाडु पर खास ध्यान दे रही है। यह राज्य फिलहाल कंपनी की कुल बिक्री में 20% का योगदान देता है। कंपनी अपने विस्तार के साथ-साथ एक प्राइवेट कंपनी के तौर पर बढ़ते कॉम्पिटिशन में ग्रोथ को बैलेंस करने की कोशिश कर रही है।
तमिलनाडु में BGauss का बढ़ता दबदबा
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली प्राइवेट कंपनी BGauss अपने विस्तार के लिए तमिलनाडु को एक अहम मार्केट के तौर पर देख रही है। कंपनी का कहना है कि देश भर में बिकने वाले उनके कुल एक लाख स्कूटर्स में से लगभग 20% सिर्फ तमिलनाडु से आते हैं। इस बड़ी चाल के पीछे तमिलनाडु का मजबूत ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम है, जिसमें चेन्नई, होसुर और कोयंबटूर जैसे शहरों में सप्लायर नेटवर्क और टेक्निकल स्किल शामिल हैं।
कौन हैं BGauss?
जो लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर पर नजर रख रहे हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि BGauss एक प्राइवेट कंपनी है और NSE या BSE जैसे पब्लिक स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड नहीं है। इसका मतलब है कि निवेशक सीधे इसके शेयर नहीं खरीद सकते। यह कंपनी RR Global ग्रुप का हिस्सा है और तेजी से अपने बिजनेस को बड़ा करने के फेज में है, जिसमें भारी कैपिटल इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है।
नई फंडिंग और नए मॉडल
2025 की शुरुआत में, BGauss ने अपने रिटेल नेटवर्क और प्रोडक्ट डेवलपमेंट को सपोर्ट करने के लिए ₹161 करोड़ की फंडिंग जुटाई थी। यह पैसा कंपनी के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि वे बेहद कॉम्पिटिटिव EV टू-व्हीलर मार्केट में हैं, जहाँ R&D, सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर और पैन-इंडिया नेटवर्क बनाने के भारी खर्चों के चलते कंपनियों पर प्रॉफिट मार्जिन का दबाव रहता है। कंपनी ने अगस्त 2026 में 'OoWah' नाम से एक नया मॉडल भी लॉन्च किया, जिसकी शुरुआती कीमत ₹94,990 है। कंपनी का लक्ष्य शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में मांग को पूरा करना है।
ग्रोथ और चुनौतियां
हालांकि तमिलनाडु में विस्तार की यह रणनीति इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की बढ़ती मांग को भुनाने के लिए है, लेकिन कंपनी को शुरुआती दौर की ग्रोथ से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। EV इंडस्ट्री में कई दूसरी कंपनियों की तरह, BGauss ने भी ऐतिहासिक रूप से ऑपरेटिंग लॉस (Operating Losses) दर्ज किए हैं, क्योंकि वे डीलरशिप (जो अब तमिलनाडु में 29 हो गई हैं) स्थापित करने और मार्केट शेयर हासिल करने पर पैसा खर्च कर रहे हैं। कंपनी का बिजनेस मॉडल इस बात पर निर्भर करता है कि वह लगातार फंडिंग और सेल्स ग्रोथ के जरिए कैश फ्लो बनाए रखे, न कि तुरंत प्रॉफिट कमाने पर।
भविष्य की राह
कंपनी की यह रणनीति ग्राहकों के बदलते व्यवहार को भी दर्शाती है। छोटे शहरों के खरीदार अब पेट्रोल वाहनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक स्कूटर्स को एक प्रैक्टिकल विकल्प के तौर पर देख रहे हैं, बशर्ते उन्हें भरोसेमंद लोकल सर्विस सपोर्ट मिले। आगे चलकर, कंपनी के लिए सबसे अहम होगा कि वह अपने कैश बर्न (Cash Burn) को मैनेज करते हुए अपने सेल्स नेटवर्क का विस्तार करे। ऑटो सेक्टर के विश्लेषक यह देखेंगे कि क्या यह विस्तार कंपनी को अपनी यूनिट इकोनॉमिक्स (Unit Economics) सुधारने और ऑपरेशनल खर्चों के लिए बाहरी फंडिंग पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
