GST 2.0 लागू होने के बाद भारतीय ऑटो सेक्टर में शानदार वॉल्यूम ग्रोथ देखी जा रही है। एंट्री-लेवल गाड़ियों की जबरदस्त मांग के बीच Maruti Suzuki और Mahindra जैसे दिग्गज अपनी प्रोडक्शन क्षमता बढ़ा रहे हैं।
डिमांड का नया इंजन: GST 2.0
GST 2.0 टैक्स स्ट्रक्चर लागू होने के बाद भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़ों के मुताबिक, पैसेंजर व्हीकल्स, टू-व्हीलर्स और कमर्शियल व्हीकल्स की सेल्स में 20% से ज्यादा का उछाल आया है। नई टैक्स व्यवस्था के चलते कीमतों में हुए बदलाव से खरीदारों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
एंट्री-लेवल सेगमेंट में हलचल
फिलहाल इस तेजी का सबसे बड़ा कारण एंट्री-लेवल गाड़ियाँ हैं। Maruti Suzuki ने अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच अपने एंट्री-लेवल सेगमेंट में 96% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। वहीं, Hyundai Motor India अब मासिक होलसेल वॉल्यूम के लिए 4,00,000 यूनिट्स को एक नया बेंचमार्क मानकर चल रही है।
कंपनियों का बड़ा दांव
बढ़ती मांग को देखते हुए ऑटो कंपनियां अब लॉन्ग-टर्म कैपेसिटी एक्सपेंशन पर फोकस कर रही हैं। Mahindra अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल कैपेसिटी को बढ़ाकर मार्च 2027 तक 4,000 नई यूनिट्स जोड़ने की योजना बना रही है। उधर, Maruti Suzuki अपने घरेलू स्केल का इस्तेमाल करके एक्सपोर्ट क्षमता को मजबूत करने में जुटी है।
अर्थव्यवस्था पर असर
इसका फायदा केवल ऑटो कंपनियों को ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी मिल रहा है। Mahindra Group का कहना है कि गाड़ियों की बेहतर अफोर्डेबिलिटी के कारण उनकी फाइनेंशियल सर्विसेज में डिफॉल्ट (Delinquency) रेट्स में कमी आई है, जो आम लोगों की मजबूत होती फाइनेंशियल हेल्थ का संकेत है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
लंबी अवधि में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कच्चे माल (Raw Materials) की लागत को कैसे मैनेज करती हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या यह वॉल्यूम ग्रोथ आगे चलकर बेहतर प्रॉफिट मार्जिन में तब्दील हो पाती है या नहीं।
