सितंबर 2026 में ऑटो सेक्टर में मिला-जुला असर देखने को मिला। त्योहारों के चलते SUV और कमर्शियल व्हीकल की बिक्री तो बढ़ी, लेकिन ग्रामीण भारत पर निर्भर ट्रैक्टर और टू-व्हीलर कंपनियों की हालत कमजोर रही। खराब नतीजों के बाद Bajaj Auto और Escorts Kubota के शेयरों में दबाव देखा गया है।
भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए सितंबर 2026 का महीना काफी अलग रहा। शहरी मांग के चलते जहां बड़ी और महंगी गाड़ियों की बिक्री रफ्तार पकड़ रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली मांग में सुस्ती ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है।
SUV और कमर्शियल वाहनों का जलवा
जिन कंपनियों का पोर्टफोलियो यूटिलिटी व्हीकल और ट्रकों पर आधारित है, उनका प्रदर्शन शानदार रहा। Mahindra & Mahindra ने 15% की सालाना बढ़त के साथ कुल 1,14,874 यूनिट्स बेचीं। कंपनी की डोमेस्टिक यूटिलिटी व्हीकल बिक्री 14% उछलकर 64,092 यूनिट्स पर रही। वहीं, Hyundai Motor India ने 77,916 यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री की, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 11% अधिक है। JSW MG Motor India की थोक बिक्री में 19% का उछाल देखा गया और यह 8,018 यूनिट्स रही, जबकि Force Motors की बिक्री 62% बढ़कर 4,027 यूनिट्स पर पहुंच गई।
ग्रामीण बाजार और टू-व्हीलर पर दबाव
इसके उलट, ग्रामीण इलाकों पर केंद्रित सेक्टर ने मार्केट को निराश किया है। Bajaj Auto की डोमेस्टिक टू-व्हीलर सेल्स 12% गिरकर 2,39,771 यूनिट्स पर आ गई, जिसके बाद कंपनी के शेयर में 7% से ज्यादा की गिरावट दिखी। ट्रैक्टर सेक्टर में भी Escorts Kubota ने 16.7% की सालाना गिरावट दर्ज की, जिससे इसके शेयर 3% से ज्यादा टूट गए।
इस कमजोरी के पीछे 'हाई बेस इफेक्ट' (High Base Effect) और बेमौसम बारिश का असर बड़ा कारण है, जिसने खेती और रूरल इनकम को प्रभावित किया है। जब ग्रामीण आय पर दबाव होता है, तो ट्रैक्टर जैसी बड़ी खरीदारी अक्सर टाल दी जाती है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या त्योहारी सीजन की डिमांड से ट्रैक्टर और टू-व्हीलर कंपनियों का इन्वेंटरी लेवल सुधर पाएगा। भविष्य में कंपनियों का मुनाफा इस बात पर निर्भर करेगा कि वे बढ़ती कच्चे माल की लागत (जैसे स्टील और रबर) को कैसे मैनेज करती हैं। निवेशकों को आने वाले महीनों में कंपनी मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर नजर रखनी चाहिए कि क्या त्योहारी बुकिंग असल डिलीवरी में बदल पा रही हैं या नहीं।
