सरकार की PLI-ऑटो स्कीम ने पूरे देश में 225 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की स्थापना को बढ़ावा दिया है, जिससे कुल ₹44,326 करोड़ का निवेश आया है। महाराष्ट्र 66 यूनिट्स के साथ सबसे आगे है, वहीं इस प्रोग्राम से 67,800 से ज़्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं। इस पहल का मकसद एडवांस्ड ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
Detailed Coverage
ऑटो PLI स्कीम ने पकड़ी रफ्तार
ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (AAT) प्रोडक्ट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पूरे भारत में 225 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित की गई हैं। बता दें कि सरकार ने सितंबर 2021 में ₹25,938 करोड़ के बजट के साथ इस स्कीम को मंजूरी दी थी, जिसका मकसद भारत को कटिंग-एज ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना है।
राज्यों में निवेश का हाल
इस स्कीम के तहत महाराष्ट्र सबसे आगे है, जहां 66 यूनिट्स स्थापित हुई हैं। इसके अलावा, तमिलनाडु में 38 यूनिट्स, हरियाणा में 35 यूनिट्स और कर्नाटक में 28 यूनिट्स काम कर रही हैं। यह क्षेत्रीय फैलाव भारत के औद्योगिक क्लस्टर्स की ओर से एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ने की व्यापक भागीदारी को दर्शाता है। इस पहल के तहत कुल निवेश ₹44,326 करोड़ तक पहुंच गया है, जो हाई-टेक क्षमताओं के विस्तार में निर्माताओं के भरोसे को दिखाता है।
बिक्री और रोजगार पर असर
पूंजीगत खर्च से परे, यह स्कीम आर्थिक गतिविधियों और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। प्रोग्राम में भाग लेने वाली कंपनियों ने बेस ईयर 2019-20 की तुलना में ₹52,414 करोड़ की अतिरिक्त बिक्री दर्ज की है। इसके अतिरिक्त, इस पहल से 67,820 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। सरकार ने योग्य लाभार्थियों को ₹2,386.36 करोड़ के इंसेंटिव पहले ही वितरित कर दिए हैं।
लोकलाइजेशन और टेक्नोलॉजी पर फोकस
PLI-ऑटो प्रोग्राम का मुख्य लक्ष्य आयातित कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करना है। इसके लिए, स्कीम में आवेदकों के लिए कम से कम 50% डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (घरेलू मूल्य वृद्धि) की शर्त रखी गई है। यह कंपनियों को आयातित पार्ट्स को सिर्फ असेंबल करने के बजाय, भारत के भीतर ही मजबूत सप्लाई चेन बनाने के लिए प्रेरित करता है। जुलाई 2026 के मध्य तक, 18 कंपनियों को 154 विशिष्ट उत्पादों के लिए औपचारिक प्रमाणन मिल चुका है, जो दर्शाता है कि लोकलाइजेशन की प्रक्रिया योजना से उत्पादन की ओर बढ़ रही है।
निवेशकों के लिए खास बातें
निवेशकों के लिए, इस स्कीम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये यूनिट्स कितनी प्रभावी ढंग से पूरी क्षमता तक पहुंचती हैं और ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं के प्रॉफिट मार्जिन में सुधार करती हैं। शुरुआती निवेश और रोजगार के आंकड़े भले ही उत्साहजनक हों, लेकिन असली परीक्षा कंपनियों की लंबी अवधि में इकोनॉमी ऑफ स्केल हासिल करने और वैश्विक व घरेलू बाजारों में प्रतिस्पर्धी बने रहने की क्षमता में निहित है। आगे चलकर, इंडस्ट्री यह देखेगी कि इंसेंटिव का वितरण कितनी तेजी से होता है और क्या 50% घरेलू मूल्य वृद्धि की आवश्यकता से मार्जिन में स्थायी सुधार होता है, या शुरुआती उच्च लागत लाभप्रदता पर दबाव बनाए रखती है। ऑटो कंपोनेंट कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजों पर नजर रहेगी कि ये PLI-समर्थित यूनिट्स राजस्व वृद्धि में कितना योगदान दे रही हैं।
