भारत की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने साफ कर दिया है कि **2023** से पहले बनी गाड़ियां E20 फ्यूल (20% इथेनॉल, 80% पेट्रोल) के लिए सुरक्षित हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना है कि इससे माइलेज में मामूली **3% से 3.5%** की कमी आ सकती है।
क्या है मामला?
भारत की दिग्गज कार निर्माता कंपनियों ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने बताया है कि 2023 से पहले लॉन्च की गई गाड़ियां E20 फ्यूल, जिसमें 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है, का इस्तेमाल आसानी से कर सकती हैं। सरकार देश के कच्चे तेल आयात पर होने वाले भारी खर्च को कम करने और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए इथेनॉल की ब्लेंडिंग बढ़ा रही है।
माइलेज पर कितना असर?
ऑटो इंडस्ट्री के लीडर्स ने E20 फ्यूल को सुरक्षित तो बताया है, लेकिन यह भी माना है कि इससे ईंधन की दक्षता (Fuel Efficiency) में करीब 3% से 3.5% की मामूली गिरावट आ सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल में ऊर्जा की मात्रा थोड़ी कम होती है। कंपनियां का कहना है कि आयात बिल घटाने और किसानों की आय बढ़ाने जैसे बड़े फायदों के लिए यह एक छोटा सा समझौता है।
भविष्य की टेस्टिंग और तैयारी
E20 के लक्ष्य समय से पहले हासिल करने के बाद, अब ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) E22 और E25 जैसे ऊंचे इथेनॉल ब्लेंड्स की कम्पैटिबिलिटी टेस्टिंग कर रहा है। इन टेस्ट्स के नतीजे दिसंबर तक आने की उम्मीद है। इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि आजकल की गाड़ियों में अक्सर जरूरी सुरक्षा मार्जिन से ज्यादा क्षमता होती है, जिससे वे फ्यूल कंपोजिशन में छोटे-मोटे बदलावों को बिना किसी मैकेनिकल नुकसान के झेल सकती हैं।
ग्राहकों की चिंताओं पर जवाब
सोशल मीडिया और कंज्यूमर फोरम पर पुरानी गाड़ियों में इंजन या फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचने की चिंताएं जताई जा रही थीं। हालांकि, Hyundai Motor India जैसी बड़ी कंपनियों का कहना है कि उन्हें फ्यूल कम्पैटिबिलिटी से जुड़ी ग्राहकों की शिकायतों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं दिखी है। इंडस्ट्री का मानना है कि यह फ्यूल ब्लेंडिंग पॉलिसी कई सालों की टेस्टिंग का नतीजा है और ब्राजील व अमेरिका जैसे देशों में अपनाए जा रहे वैश्विक तरीकों के अनुरूप है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
ऑटोमोबाइल और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर नज़र रखने वाले निवेशकों को तीन बातों पर ध्यान देना चाहिए: पहला, ARAI की E22 और E25 ब्लेंड्स की टेस्टिंग का नतीजा, जो भविष्य की पॉलिसी और व्हीकल इंजीनियरिंग को प्रभावित करेगा। दूसरा, अगर माइलेज का मुद्दा ग्राहकों की मांग को प्रभावित करता है, तो डिमांड पैटर्न में होने वाले बदलाव। तीसरा, OMCs के मार्जिन पर असर, क्योंकि उन्हें इथेनॉल खरीद की लागत और सरकारी लक्ष्यों को साधना होगा।
