ऑटो सेक्टर में बड़ा यू-टर्न: EV से पीछे हटें दिग्गज, हजारों करोड़ के भारी नुकसान के बाद आया ये फैसला!

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AuthorNeha Patil|Published at:
ऑटो सेक्टर में बड़ा यू-टर्न: EV से पीछे हटें दिग्गज, हजारों करोड़ के भारी नुकसान के बाद आया ये फैसला!
Overview

दुनियाभर की प्रमुख ऑटो कंपनियां अब सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) के अपने पुराने प्लान से पीछे हट रही हैं। बढ़ती लागत, घटती सरकारी सब्सिडियां और धीमी EV बिक्री की रफ्तार के चलते, वे अब हाइब्रिड और पारंपरिक इंजन (ICE) वाले मल्टी-एनर्जी पावरट्रेन पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इस बड़े रणनीतिक बदलाव के कारण कई दिग्गज कंपनियों को अरबों डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

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ऑटो सेक्टर का बड़ा यू-टर्न: EV से दूरी, हाइब्रिड की ओर बढ़ते दिग्गज

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में इलेक्ट्रीफिकेशन को लेकर जो पहले एकतरफा रुझान दिख रहा था, अब वह बदल रहा है। अब कंपनियां सिर्फ बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (BEVs) पर निर्भर रहने के बजाय एक अधिक व्यावहारिक 'मल्टी-एनर्जी' रणनीति अपना रही हैं। यह बदलाव मैक्रो-इकोनॉमिक दबावों और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं के बीच हो रहा है।

हाइब्रिड और ICE की ओर बढ़ता ऑटो सेक्टर

दुनिया भर की बड़ी कार निर्माता कंपनियां अब सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बनाने के अपने लक्ष्य से पीछे हट रही हैं। वे मल्टी-एनर्जी पावरट्रेन यानी हाइब्रिड और पारंपरिक इंजन (ICE) वाले व्हीकल्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। इसकी मुख्य वजहें हैं - बढ़ती लागत, सप्लाई चेन में दिक्कतें और कच्चे माल की ऊंची कीमतें। इन चुनौतियों को देखते हुए, Elara Capital जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने ऑटो और ऑटो एंसिलरी सेक्टर के लिए अपनी राय 'Sell' बरकरार रखी है। S&P Global Mobility का अनुमान है कि 2026 में पैसेंजर व्हीकल (PV) प्रोडक्शन 0.2% घट सकता है।

इस बड़े बदलाव के कारण, कंपनियों ने अपने EV निवेश पर भारी नुकसान उठाया है। Stellantis ने 2025 में $26.3 बिलियन का भारी नेट लॉस दर्ज किया है, जिसका मुख्य कारण EV स्ट्रेटेजी को रीसेट करने के लिए लगभग $30 बिलियन का राइट-डाउन है। Ford अपनी EV बिजनेस स्ट्रेटेजी में बदलाव के लिए लगभग $19.5 बिलियन का चार्ज ले रही है, जबकि General Motors (GM) 2025 की चौथी तिमाही में अपनी EV स्ट्रेटेजी से पीछे हटने के लिए करीब $6 बिलियन का चार्ज रिकॉर्ड करेगी, जिससे 2025 के लिए उसका कुल EV-संबंधित नुकसान $7.6 बिलियन तक पहुंच जाएगा। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि EV को लेकर पहले लगाई गई उम्मीदें शायद बहुत ज्यादा थीं।

अलग-अलग सेगमेंट में प्रदर्शन में भिन्नता

ऑटो इंडस्ट्री में फिलहाल परफॉरमेंस के मामले में साफ अंतर दिख रहा है। खासकर चीन और अमेरिका में पैसेंजर व्हीकल (PV) मार्केट पर दबाव है, जिसकी वजह सब्सिडियों में कमी और कंपनियों के बीच मार्केट शेयर की लड़ाई है। Elara Capital ने Tata Motors के PV बिजनेस पर 'Reduce' रेटिंग बनाए रखी है, जिसका कारण Jaguar Land Rover (JLR) को चीन में मिल रही दिक्कतें और MENA क्षेत्र में इसका एक्सपोजर है।

दूसरी ओर, कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में रिकवरी और ग्रोथ के संकेत मिल रहे हैं। Volvo Group ने 2026 के लिए यूरोप और अमेरिका में ग्रोथ का सकारात्मक अनुमान जताया है, जिससे Tata Motors और Bharat Forge जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है, जिनके पास बड़े CV ऑपरेशंस हैं। वहीं, Sona BLW Precision Forgings जैसी ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए, कुछ अमेरिकी OEMs द्वारा इंटरनल कम्बस्चन इंजन (ICE) और हाइब्रिड मॉडल्स पर फिर से फोकस करने से मीडियम-टर्म में ग्रोथ के अवसर मिल सकते हैं। यह पहले की अपेक्षाओं के विपरीत है, जिसमें स्ट्रक्चरल गिरावट का अंदेशा था।

EV मार्केट का री-अलाइनमेंट और क्षेत्रीय बदलाव

ग्लोबल इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में भी बड़ा री-अलाइनमेंट हो रहा है। मांग में उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों का असर दिख रहा है। जनवरी 2026 में, ग्लोबल EV सेल्स पिछले साल की तुलना में 3% गिरी है। चीन में इसमें 20% की गिरावट आई, जबकि उत्तरी अमेरिका में यह 33% सिकुड़ गया। चीन के मार्केट में EV खरीद टैक्स और कम आकर्षक ट्रेड-इन स्कीम के कारण नरमी आई। अमेरिका में, फेडरल EV टैक्स क्रेडिट्स की समाप्ति और बढ़ती गाड़ियों की कीमतों के कारण EV सेल्स जनवरी 2026 में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं।

इसके विपरीत, यूरोप में EV सेल्स में 24% की बढ़ोतरी देखी गई, जो EU के उत्सर्जन मानकों और सब्सिडी प्रोग्राम्स से प्रेरित है। इन क्षेत्रीय भिन्नताओं के बावजूद, यह एक स्पष्ट संकेत है कि EV को लेकर अब बाजार-संचालित (market-driven) अपनाने की ओर बढ़ा जा रहा है, जहां सरकारें स्थिरता के साथ-साथ अफोर्डेबिलिटी और ऊर्जा सुरक्षा को भी संतुलित कर रही हैं। PwC का कहना है कि अमेरिका में BEV को अपनाने की रफ्तार धीमी पड़ रही है, जबकि हाइब्रिड गाड़ियों की लोकप्रियता बढ़ रही है।

आगे क्या? विश्लेषकों का नजरिया

आने वाले समय में ऑटो इंडस्ट्री में अस्थिरता बने रहने की उम्मीद है, लेकिन कंपनियां रणनीतिक रूप से खुद को ढाल भी रही हैं। 2026 में ग्लोबल लाइट-व्हीकल प्रोडक्शन में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है, लेकिन बाजार की स्थितियां पारंपरिक और हाइब्रिड पावरट्रेन में वापसी का संकेत दे रही हैं। कंपनियां अब आक्रामक वॉल्यूम ग्रोथ की बजाय मार्जिन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

भारत की कंपनियों के लिए, Elara Capital की Samvardhana Motherson और Tata Motors के PV डिवीजन पर सतर्क राय का मतलब है कि निकट भविष्य में ज्यादा तेजी की उम्मीद कम है। हालांकि, Tata Motors और Bharat Forge के लिए CV सेगमेंट का मजबूत आउटलुक कुछ सहारा दे सकता है। Sona BLW को हाइब्रिड कंपोनेंट्स पर बढ़ते फोकस से फायदा मिल सकता है।

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