भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) निर्माताओं को बड़ा झटका दिया है। अब सभी ऑटो कंपनियों को अपनी EV बैटरी सिस्टम की साइबर सुरक्षा (Cyber Security) की तुरंत जांच करनी होगी। सरकार 1 अक्टूबर 2026 से नए सुरक्षा मानक AIS-189 और AIS-190 लागू करने जा रही है, ताकि गाड़ियों को दूर से हैक होने से बचाया जा सके।
EV के लिए कड़े साइबर सुरक्षा नियम
भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) ने ऑटोमोबाइल निर्माताओं और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) जैसे उद्योग संघों को एक सीधा निर्देश जारी किया है। यह कदम इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी सिस्टम में गंभीर सुरक्षा खामियों की रिपोर्टों के बाद उठाया गया है। सरकार इस बात से चिंतित है कि हैकर्स ब्लूटूथ-सक्षम एप्लीकेशन के जरिए चलती हुई EV को दूर से बंद कर सकते हैं।
नए रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स
इन सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए, मंत्रालय AIS-189 और AIS-190 नामक अनिवार्य मानक (Mandatory Standards) पेश करने की तैयारी कर रहा है। 1 अक्टूबर 2026 से, सभी ऑटो कंपनियों को औपचारिक साइबर सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली (Cyber Security Management Systems) और सॉफ्टवेयर अपडेट प्रबंधन प्रणाली (Software Update Management Systems) लागू करनी होगी। ये नियम ओवर-द-एयर (OTA) सॉफ्टवेयर अपडेट को सुरक्षित बनाने, यूजर ऑथेंटिकेशन प्रोटोकॉल को बेहतर करने और गाड़ी के हर स्टेज पर सॉफ्टवेयर की अखंडता सुनिश्चित करने पर जोर देंगे।
जबकि AIS-156 और AIS-038 जैसे पिछले नियमों का फोकस बैटरी सुरक्षा और टेलीमैटिक्स पर था, वे वायरलेस साइबर खतरों से सुरक्षा को लेकर कोई खास निर्देश नहीं देते थे। सरकार के इस कदम से निर्माताओं को इन नए और सख्त सुरक्षा नियमों को पूरा करने के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड में अपना कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
सुरक्षा जोखिम को समझना
मंत्रालय का यह निर्देश BAT-BMS एप्लीकेशन से जुड़ी तकनीकी रिपोर्टों पर आधारित है। इस एप्लीकेशन में ई-रिक्शा की बैटरी डिस्चार्ज फंक्शन को दूर से बंद करने की क्षमता पाई गई थी। हालांकि, एप्लीकेशन के डेवलपर, शेनझेन ग्रेएनर्जी टेक्नोलॉजी (Shenzhen Grenergy Technology) ने इसे एक लीगल मैनेजमेंट इंटरफेस बताया है। लेकिन, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या तब होती है जब बैटरी पैक को डिफॉल्ट पासवर्ड या कमजोर ऑथेंटिकेशन के साथ इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि ये बैटरी सिस्टम अक्सर ब्लूटूथ के जरिए कम्युनिकेशन करते हैं, इसलिए थोड़ी दूरी पर मौजूद गाड़ियाँ बाहरी हस्तक्षेप के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।
निर्माताओं पर संभावित असर
भारतीय EV निर्माताओं के लिए, यह बदलाव डिजाइन लेवल पर साइबर सुरक्षा को अनिवार्य बनाने की दिशा में एक कदम है। यह एक मजबूत कनेक्टेड व्हीकल इकोसिस्टम बनाने में मदद करेगा, लेकिन साथ ही लागत बढ़ने और तेजी से अनुपालन (Compliance) की जरूरत का जोखिम भी पैदा करेगा। निवेशकों को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि कंपनियाँ कितनी जल्दी नए AIS-189 और AIS-190 मानकों को अपना पाती हैं और क्या इससे निकट भविष्य में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) खर्च बढ़ने की संभावना है। सरकार ने ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) जैसे उद्योग संघों को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा है कि अक्टूबर की डेडलाइन से पहले सभी हितधारक, जिनमें कंपोनेंट सप्लायर्स भी शामिल हैं, इन साइबर सुरक्षा अपग्रेड को प्राथमिकता दें।
