वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1FY27) में ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्षेत्रीय असंतुलन देखने को मिला है। जहां पूरे देश में पैसेंजर व्हीकल की ग्रोथ **25%** रही, वहीं दक्षिण भारत में यह आंकड़ा **35%** पर पहुंच गया है। ईवी (EV) एडॉप्शन और जीएसटी एडजस्टमेंट ने इस तेजी में बड़ी भूमिका निभाई है।
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत के ऑटो सेक्टर में एक स्पष्ट क्षेत्रीय विभाजन देखने को मिला है। जहां राष्ट्रीय स्तर पर ग्रोथ स्थिर बनी हुई है, वहीं दक्षिण भारत सबसे मजबूत बाजार के रूप में उभरा है।
पैसेंजर और टू-व्हीलर सेगमेंट का हाल
राष्ट्रीय स्तर पर पैसेंजर व्हीकल की वॉल्यूम में 25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, दक्षिण और पूर्वी बाजारों ने क्रमशः 35% और 29% की ग्रोथ हासिल की। इसके विपरीत, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में ग्रोथ 20% से नीचे रही। टू-व्हीलर मार्केट में भी दक्षिण भारत ने बाजी मारी है, जहां इलेक्ट्रिक स्कूटर अब कुल बिक्री का 56.5% हिस्सा बन चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में 310 बेसिस पॉइंट्स की उछाल है।
कमर्शियल व्हीकल और सप्लाई चेन
कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में राष्ट्रीय स्तर पर 21% की ग्रोथ के मुकाबले, दक्षिण में 33% का बड़ा उछाल देखा गया, जबकि उत्तर में यह केवल 13% तक सीमित रहा। यह अंतर औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में तेजी को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनका सेल्स नेटवर्क दक्षिण भारत में मजबूत है। हालांकि, कच्चे माल (Raw material) की लागत में उतार-चढ़ाव और छोटी ऑटो-कंपोनेंट कंपनियों की लिक्विडिटी (Liquidity) की समस्या मुनाफे के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। साथ ही, छोटी कंपनियों में वर्किंग कैपिटल की कमी के कारण OEMs के प्रोडक्शन में देरी का जोखिम भी बना हुआ है।
