बजट का असर और पॉलिसी सपोर्ट
ऑटो डीलर्स का यह आशावादी रुख मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल (Macroeconomic Environment) का नतीजा है. खासकर, इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और एग्रीकल्चर (Agriculture) डेवलपमेंट पर फोकस वाले बजट, GST के बाद पॉलिसी में आई कंसिस्टेंसी (Policy Consistency) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से स्टेबल इंटरेस्ट रेट्स (Stable Interest Rates) ने भरोसे को और बढ़ाया है. डीलर्स को ग्राहकों से पूछताछ (Customer Enquiry Pipelines) में तेजी और कन्वर्जन रेट्स (Conversion Rates) में सुधार दिख रहा है. हालांकि, कुछ राज्यों में संभावित इलेक्शन-रिलेटेड डिसरप्शन्स (Election-Related Disruptions), सीज़नल स्लोडाउन (Seasonal Slowdowns) और कभी-कभी मॉडल की उपलब्धता (Model Availability) जैसी चुनौतियों पर भी वे नज़र बनाए हुए हैं.
पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में तेजी
खासकर पैसेंजर व्हीकल्स (Passenger Vehicles) के लिए फरवरी और मार्च में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है. यह तेजी बुकिंग पाइपलाइन्स (Booking Pipelines) में मजबूती, नए मॉडल लॉन्च (New Model Launches) और वेरिएंट्स (Variants) को लेकर एक्साइटमेंट, और फाइनेंशियल ईयर-एंड (Financial Year-End) पर होने वाली खरीददारी की वजह से है, जिसमें कभी-कभी डेप्रिसिएशन-लेड स्ट्रेटेजीज (Depreciation-Led Strategies) भी शामिल होती हैं. हालांकि, अप्रैल तक यह सामान्य हो सकता है क्योंकि फेस्टिव इंटेंसिटी (Festive Intensity) कम होगी और बेस इफेक्ट्स (Base Effects) विभिन्न ब्रांड्स और रीजन्स में ज्यादा दिखेंगे.
2-व्हीलर (2W) सेगमेंट में भी हलचल
2-व्हीलर (Two-Wheeler) सेगमेंट में भी पॉजिटिव ग्रोथ की संभावना है. मौजूदा इंक्वायरीज़ का कन्वर्जन (Conversion of Existing Enquiries), फेस्टिव और वेडिंग सीजन (Festive and Wedding Season) की बची हुई डिमांड, फसल बिक्री से बेहतर हुई रूरल इनकम (Rural Incomes) और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, स्कूटर्स और कम्यूटर मोटरसाइकिल (Electric Vehicles, Scooters, Commuter Motorcycles) को लेकर बढ़ती कंज्यूमर एक्सेप्टेंस (Consumer Acceptance) इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं. हालांकि, सप्लाई इश्यूज (Supply Issues) या इलेक्शन कोड्स (Election Codes) के कारण फुट ट्रैफिक (Foot Traffic) प्रभावित होने वाले इलाकों में ग्रोथ सीमित रह सकती है.
जनवरी के सेल्स आंकड़े
जनवरी के रिटेल सेल्स (Retail Sales) के आंकड़े इस मजबूत मांग को दर्शाते हैं. पैसेंजर व्हीकल रिटेल सेल्स पिछले साल के मुकाबले 7.22% बढ़कर 5,13,475 यूनिट्स पर पहुंच गई. 2-व्हीलर सेल्स में 21% का बड़ा उछाल आकर यह 18,52,870 यूनिट्स रही. 3-व्हीलर रजिस्ट्रेशन (Three-Wheeler Registrations) 19% बढ़कर 1,27,134 यूनिट्स हुए, और कमर्शियल व्हीकल (Commercial Vehicle) की बिक्री 15% बढ़कर 1,07,486 यूनिट्स रही. कुल मिलाकर, सभी कैटेगरीज़ में डोमेस्टिक रिटेल सेल्स (Domestic Retail Sales) पिछले साल के मुकाबले लगभग 18% बढ़कर 27,22,558 यूनिट्स हो गई.
ग्रोथ के मुख्य कारण
यह ब्रॉड-बेस्ड ग्रोथ (Broad-Based Growth) GST के बाद की लगातार Momentum, सफल फसलों और चल रहे वेडिंग सीज़न से मिले हेल्दी रूरल कैश फ्लोज़ (Healthy Rural Cash Flows), और पर्सनल मोबिलिटी (Personal Mobility) व फ्रेट ट्रांसपोर्ट (Freight Transport) दोनों सेक्टरों में कंसिस्टेंट डिमांड विज़िबिलिटी (Consistent Demand Visibility) की वजह से संभव हुई. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के मुताबिक, इन फैक्टर्स ने मिलकर मार्केट को आगे बढ़ाया है.