E20 फ्यूल की क्वालिटी पर ऑटो बॉडी ने जताई चिंता, इंजन खराब होने का खतरा!

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AuthorAditya Rao|Published at:
E20 फ्यूल की क्वालिटी पर ऑटो बॉडी ने जताई चिंता, इंजन खराब होने का खतरा!

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने सरकार को E20 फ्यूल में मिलावट को लेकर आगाह किया है। इस मिलावट से गाड़ियों के इंजन और एग्जॉस्ट कंपोनेंट्स खराब हो रहे हैं। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि ऐसे मामले बहुत कम हैं और इन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

E20 फ्यूल में क्यों हो रही है दिक्कत?

पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाकर बनाए जाने वाले E20 फ्यूल की क्वालिटी को लेकर परेशानियां सामने आ रही हैं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने सरकारी एजेंसियों को इस बाबत एक औपचारिक चिट्ठी लिखी है। कंपनी का कहना है कि रिटेल आउटलेट्स पर बिकने वाले फ्यूल में ऐसी दिक्कतें पाई गई हैं, जिनसे गाड़ियों के इंजन और दूसरे पुर्जे खराब हो रहे हैं। SIAM की जांच में पता चला है कि फ्यूल में क्लोराइड और नमी की मात्रा तय मानकों से काफी ज्यादा है, जिससे गाड़ियों में जंग लगने और पुर्जे घिसने की समस्या आ रही है।

इंजन पर असर और फ्यूल स्टैंडर्ड्स

SIAM की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ रिटेल आउटलेट्स से लिए गए फ्यूल सैंपल में क्लोराइड की मात्रा 350 mg/kg तक पाई गई है। इंडस्ट्री बॉडी का मानना है कि इस अशुद्धि और ज्यादा नमी की वजह से फ्यूल के कंपोनेंट्स अलग हो सकते हैं, जिससे गाड़ी बीच रास्ते में बंद पड़ सकती है। इस समस्या से निपटने के लिए SIAM ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) से E20 और E85 फ्यूल के लिए क्लोराइड की एक सख्त सीमा तय करने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा है कि कमर्शियल इस्तेमाल के लिए यह सीमा 1 mg/kg से कम होनी चाहिए। इसके अलावा, SIAM ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से पुरानी अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक और पाइपलाइनों की जांच करने का भी सुझाव दिया है, क्योंकि ये भी क्वालिटी की समस्या की जड़ हो सकते हैं।

सरकारी जवाब और निगरानी

इन चिंताओं के जवाब में, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ किया है कि फ्यूल की क्वालिटी की नियमित तौर पर जांच की जाती है। मंत्रालय ने बताया कि OMCs ने देश भर में फैले 87,000 से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स पर अपनी टेस्टिंग प्रक्रिया को और मजबूत किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, क्लोराइड और सल्फाइड की मिलावट के लिए टेस्ट किए गए 2,000 सैंपल में से सिर्फ दो मामलों में ही दिक्कत पाई गई। सरकार ने कहा है कि जिन पेट्रोल पंपों पर ये दिक्कतें मिली थीं, वहां फौरन बिक्री रोक दी गई थी और नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ आगे भी एक्शन लिया जाएगा।

निवेशकों और गाड़ी मालिकों के लिए अहम जानकारी

निवेशकों के लिए, फ्यूल की क्वालिटी ऑटोमोबाइल कंपनियों (OEMs) के लिए बहुत मायने रखती है। अगर फ्यूल में लगातार मिलावट होती रही, तो कार और टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनियों को वारंटी क्लेम और सर्विसिंग का खर्च बढ़ सकता है। दूसरी ओर, इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए फ्यूल की क्वालिटी बनाए रखना ज़रूरी है, ताकि वे जुर्माने से बच सकें और अपनी ब्रांड इमेज को सुरक्षित रख सकें। सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देकर तेल के आयात पर होने वाले खर्च को कम करना चाहती है। इसलिए, पेट्रोल पंपों पर इंफ्रास्ट्रक्चर और क्वालिटी कंट्रोल पर लंबे समय तक नज़र रखना ज़रूरी होगा। निवेशकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि क्या सरकार क्लोराइड के लिए BIS के नियमों को और कड़ा करती है। अगर ऐसा होता है, तो पुरानी जगहों पर स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए OMCs को बड़ा निवेश करना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.