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Atul Auto Share Price: मार्च की सेल्स पर भागा शेयर, पर EV में गिरावट ने बढ़ाई चिंता

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Atul Auto Share Price: मार्च की सेल्स पर भागा शेयर, पर EV में गिरावट ने बढ़ाई चिंता
Overview

Atul Auto के शेयरों में आज मार्च महीने के सेल्स नंबर्स आने के बाद जोरदार उछाल देखा गया। दिग्गज निवेशक विजय केडिया के मजबूत निवेश और डोमेस्टिक सेल्स में हल्की बढ़ोतरी ने स्टॉक को सहारा दिया। मगर, अगर हम सेल्स के ब्रेकअप पर गौर करें तो एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आता है: जहां 3-व्हीलर ICE (Internal Combustion Engine) गाड़ियों की बिक्री स्थिर रही, वहीं इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बिक्री साल-दर-साल (YTD) आधार पर गिरी है। EV मार्केट में इस धीमेपन के साथ-साथ स्टॉक का हाई वैल्यूएशन, शुरुआती उत्साह को थोड़ा फीका कर रहा है और कंपनी के भविष्य की ग्रोथ पर सवाल खड़े कर रहा है।

मार्च में मामूली बढ़ोतरी, EV ट्रेंड चिंताजनक

Atul Auto ने मार्च 2026 में ओवरऑल सेल्स वॉल्यूम में 0.38% की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की, जो 3,404 यूनिट्स रही। इस छोटी सी बढ़ोतरी का मुख्य कारण इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बिक्री में 2.34% की बढ़त रहा, जो महीने भर में 699 यूनिट्स तक पहुंची। हालांकि, यह मासिक परफॉरमेंस साल-दर-साल (YTD) के एक चिंताजनक ट्रेंड के बिल्कुल विपरीत है। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY25-26) में, डोमेस्टिक सेल्स में 6.98% की बढ़ोतरी हुई, जिसका बड़ा श्रेय ICE व्हीकल सेल्स में 12.84% की उछाल को जाता है, जबकि EV सेल्स में 8.19% की गिरावट आई। यह अंतर Atul Auto की इलेक्ट्रिफिकेशन स्ट्रेटेजी और मार्केट की डिमांड को लेकर सवाल खड़े करता है।

सेल्स मिक्स में बदलाव और वैल्यूएशन की चिंता

जहां मार्च के सेल्स फिगर एक पॉजिटिव मोमेंटम दिखा रहे हैं, वहीं Atul Auto के सेल्स मिक्स पर करीब से नज़र डालें तो एक बड़ा अंतर दिखाई देता है। मार्च 2026 में डोमेस्टिक सेल्स में 0.38% की मामूली बढ़ोतरी हुई, जिसमें 3-व्हीलर ICE की बिक्री स्थिर रही (2,705 यूनिट्स, 0.11% की गिरावट) और EV की बिक्री में थोड़ी बढ़ोतरी हुई (699 यूनिट्स, 2.34% की बढ़त)। यह तस्वीर फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY2025-26) के साल-दर-साल (YTD) आंकड़ों से काफी अलग है। पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए, डोमेस्टिक सेल्स में 6.98% की बढ़ोतरी हुई, जो मुख्य रूप से ICE व्हीकल्स में 12.84% की उछाल के कारण थी, जबकि EV सेल्स में 8.19% की गिरावट आई। मार्च की मामूली पॉजिटिविटी के बावजूद, YTD EV सेल्स में आई यह गिरावट Atul Auto के इलेक्ट्रिक ऑफर्स की लॉन्ग-टर्म वायबिलिटी और मार्केट एक्सेप्टेंस पर सवाल उठाती है। डोमेस्टिक और एक्सपोर्ट सेल्स का पैटर्न भी ऐसा ही रहा, जिसमें ICE व्हीकल्स ने YTD में दमदार ग्रोथ (20.34%) दिखाई और EV में गिरावट (8.50%) रही।

शेयर में उछाल और निवेशक का साथ

Atul Auto के शेयर 1 अप्रैल 2026 को 8.64% तक उछलकर इंट्राडे हाई ₹414.55 पर पहुंच गए। इस रैली को बिजनेस अपडेट और दिग्गज निवेशक विजय केडिया (जिनकी 18.20% हिस्सेदारी है) के सपोर्ट का सहारा मिला। शेयर ₹412.40 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले क्लोजिंग से 7.90% ज्यादा था। इस परफॉरमेंस ने बेंचमार्क NSE Nifty50 (जो उस दिन 2.29% बढ़ा) को भी पीछे छोड़ दिया। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹1,154.45 करोड़ था।

वैल्यूएशन पर सवाल

हालांकि, वैल्यूएशन मेट्रिक्स (Valuation Metrics) से थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह मिलती है। Atul Auto का ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ्स (TTM) P/E रेशियो लगभग 31.9 से 34.53 के बीच है, कुछ स्रोतों में यह 57.0x तक भी दिख रहा है। ICRA के अनुसार, FY26 के लिए कमर्शियल व्हीकल (CV) सेक्टर में अनुमानित 3-5% की मध्यम ग्रोथ की तुलना में यह वैल्यूएशन काफी ज्यादा लगता है। Bajaj Auto और TVS Motor जैसी बड़ी कंपनियाँ, जिनका मार्केट कैप ज्यादा है और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाइड है, अक्सर इसी या इससे कम P/E मल्टीपल पर ट्रेड करती हैं। यह बताता है कि Atul Auto की मौजूदा शेयर कीमत शायद उस ऑप्टिमिज्म को दिखा रही है जो YTD EV सेल्स परफॉरमेंस से पूरी तरह समर्थित नहीं है।

प्रतिद्वंद्वियों से तुलना

Bajaj Auto और TVS Motor जैसी कंपनियाँ EV सेगमेंट में ज्यादा मजबूत कमिटमेंट और सफलता दिखा रही हैं। उदाहरण के लिए, नवंबर 2025 में Bajaj Auto ने बताया कि उसके पैसेंजर 3-व्हीलर सेल्स का 21.2% और कार्गो सेल्स का 9.8% हिस्सा EV का था। TVS Motor के लिए यह आंकड़ा नवंबर 2025 में पैसेंजर के लिए 53.5% और कार्गो 3-व्हीलर्स के लिए 4.8% था। Mahindra Last Mile Mobility ने भी EVs को आक्रामक रूप से प्रमोट किया, नवंबर 2025 में पैसेंजर में 97% और कार्गो 3-व्हीलर्स में 54.3% EV शेयर हासिल किया। इसके विपरीत, Atul Auto का EV पेनिट्रेशन पैसेंजर के लिए 5.2% और कार्गो 3-व्हीलर्स के लिए 16.8% (नवंबर 2025 तक) था, जो काफी कम है। EV की ओर बढ़ते मार्केट में यह बड़ा अंतर Atul Auto के लिए एक कॉम्पिटिटिव डिसएडवांटेज दिखाता है। हालांकि भारतीय CV इंडस्ट्री में FY26 में 3-5% ग्रोथ का अनुमान है (जिसमें LCVs और बसें प्रमुख हैं), M&HCVs में केवल 0-3% ग्रोथ की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर्स (e3Ws) को पारंपरिक LCV ट्रक सेल्स की कैनिबलाइजेशन (cannibalization) में योगदान करने वाला एक फैक्टर माना जा रहा है।

एनालिस्ट्स की राय और स्ट्रक्चरल कमजोरी

हालिया शेयर में उछाल के बावजूद, कई एनालिस्ट्स Atul Auto को लेकर बियरिश (Bearish) नज़रिए पर कायम हैं। 10 एनालिस्ट्स में से कन्सेंसस रिकमेंडेशन 'स्ट्रॉन्ग सेल' (4 'स्ट्रॉन्ग सेल', 4 'सेल') है। केवल 2 एनालिस्ट्स 'होल्ड' की सलाह दे रहे हैं, और कोई भी 'बाय' रेटिंग नहीं है। यह सेंटीमेंट शायद सिर्फ तत्काल सेल्स के आंकड़ों से परे की चिंताओं से जुड़ा है। हालांकि Atul Auto 2017 से EVs में सक्रिय है, FY2025-26 के लिए YTD EV सेल्स में आई गिरावट एक गंभीर मुद्दा है। हिस्टॉरिकल डेटा P/E रेशियो में उतार-चढ़ाव दिखाता है, जिसमें FY2022-2023 में नेगेटिव अर्निंग्स भी शामिल थीं। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) भी कम है, लगभग 4.99% या 8.28%। ICE व्हीकल्स पर निर्भरता, जो वर्तमान में सेल्स बढ़ा रही है, एक स्ट्रक्चरल वीकनेस बन सकती है क्योंकि रेगुलेशन और कंज्यूमर प्रेफरेंस तेजी से EVs की ओर बढ़ रहे हैं। Bajaj Auto या TVS Motor जैसे बड़े खिलाड़ियों के विपरीत, जिनके पास मजबूत EV पोर्टफोलियो और मार्केट शेयर है, Atul Auto इस महत्वपूर्ण ट्रांजीशन में पिछड़ता दिख रहा है। लिमिटेड पास्ट एनालिस्ट कवरेज यह भी बताता है कि शायद सस्टेंड इंस्टीट्यूशनल अटेंशन की कमी है, जिससे भविष्य की ग्रोथ को फोरकास्ट करना मुश्किल हो सकता है।

भविष्य की ग्रोथ EV की सफलता पर टिकी

आगे देखते हुए, Atul Auto के सामने कमर्शियल व्हीकल मार्केट की ग्रोथ का फायदा उठाने और अपनी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ट्रांजीशन को तेज करने की चुनौती है। निवेशक विजय केडिया का पॉजिटिव सेंटीमेंट शॉर्ट-टर्म सपोर्ट प्रदान करता है। हालांकि, लॉन्ग-टर्म आउटलुक इस बात पर निर्भर करेगा कि Atul Auto अपनी YTD EV सेल्स की गिरावट को पलट पाती है और मजबूत EV पोर्टफोलियो वाले खिलाड़ियों से प्रभावी ढंग से मुकाबला कर पाती है। ब्रोकरेज सेंटीमेंट मुख्य रूप से नेगेटिव बना हुआ है, जो सस्टेनेबल ग्रोथ दिखाने के लिए स्ट्रैटेजिक रीअलाइनमेंट की आवश्यकता पर जोर देता है, खासकर विकसित हो रहे इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर सेगमेंट में।

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