इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी Ather Energy का मार्केट कैप ₹50,000 करोड़ तक पहुँच गया है। मई 2025 में IPO के बाद, FY2026 में 262,942 यूनिट्स की बिक्री के साथ कंपनी ने 18.6% मार्केट शेयर हासिल किया है।
Ather Energy: ₹50,000 करोड़ के पार पहुंचा वैल्यूएशन
भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में Ather Energy ने अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। कंपनी का वैल्यूएशन अब लगभग ₹50,000 करोड़ हो गया है। IIT मद्रास के एक लैब प्रोजेक्ट के तौर पर 2013 में शुरू हुई यह कंपनी, मई 2025 में IPO के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्टेड हो चुकी है। इस ग्रोथ ने भारतीय टू-व्हीलर मार्केट में एक बड़ा बदलाव दिखाया है, जहाँ Ather अब तीसरे सबसे बड़े इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता के रूप में उभरी है।
दमदार बिक्री और मार्केट में पैठ
कंपनी के हालिया आंकड़े शानदार वॉल्यूम ग्रोथ दिखा रहे हैं। मार्च 2026 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में, Ather ने 262,942 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल के मुकाबले 69% ज़्यादा है। इस बेहतरीन प्रदर्शन का एक बड़ा कारण Ather Rizta मॉडल रहा, जिसे अप्रैल 2024 में लॉन्च किया गया था। 2026 की शुरुआत तक, इस मॉडल ने कंपनी की मंथली सेल्स वॉल्यूम का 76% हिस्सा कवर किया। मुख्यधारा के प्रोडक्ट्स पर फोकस करने से कंपनी ने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में 18.6% मार्केट शेयर हासिल कर लिया है।
वर्टिकल इंटीग्रेशन पर कंपनी का फोकस
Ather का बिजनेस मॉडल अपनी टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट का बड़ा हिस्सा इन-हाउस रखने पर आधारित है। कई कम्पटीटर्स के विपरीत जो इम्पोर्टेड डिज़ाइन पर निर्भर करते हैं, Ather ने अपने बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS), मोटर कंट्रोलर्स और सॉफ्टवेयर स्टैक को खुद डेवलप किया है। इस अप्रोच से 90% से ज़्यादा कंपोनेंट्स का लोकलाइजेशन हुआ है, सिवाय बैटरी सेल्स के जिन्हें अभी भी इम्पोर्ट किया जाता है। अपने सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम को मैनेज करके, कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को अलग बनाती है, जिनमें इंटीग्रेटेड टचस्क्रीन और कनेक्टिविटी फीचर्स शामिल हैं, जो पारंपरिक भारतीय स्कूटर मार्केट में स्टैंडर्ड नहीं थे।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
कंपनी ने मई 2025 में अपने IPO के ज़रिए ₹2,980 करोड़ जुटाए थे, और शेयर ₹328 पर लिस्ट हुआ था। Ather ने रेवेन्यू और वॉल्यूम ग्रोथ तो तेजी से दिखाई है, लेकिन निवेशक कंपनी की प्रोडक्शन कॉस्ट को मैनेज करने की क्षमता और बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर नज़र बनाए हुए हैं। भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर उद्योग इस समय काफी कॉम्पिटिटिव है, जहाँ पुरानी बड़ी कंपनियाँ अपने EV पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही हैं और कई नई EV स्टार्टअप्स भी मैदान में हैं।
निवेशकों के लिए एक बड़ा सवाल यह है कि क्या कंपनी प्रोडक्शन बढ़ाने के साथ-साथ अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख पाएगी। हालांकि, ज़्यादा लोकलाइजेशन से सप्लाई चेन पर कुछ कंट्रोल मिला है, लेकिन इम्पोर्टेड बैटरी सेल्स और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनी के बॉटम लाइन को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, कंपनी की सेल्स ज़्यादातर कुछ खास मॉडल्स पर निर्भर करती है, इसलिए फ्यूचर ग्रोथ Ather Rizta की डिमांड और नए प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग पर टिकी होगी। मार्केट पार्टिसिपेंट्स कंपनी के कैपिटल स्पेंडिंग पर भी नज़र रखेंगे, क्योंकि कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर काम कर रही है।
