Ather Energy का मानना है कि अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इंडस्ट्री सरकारी सब्सिडी के बिना भी आत्मनिर्भर हो चुकी है। बढ़ती डिमांड और **50** दिनों के वेटिंग पीरियड को कम करने के लिए कंपनी **2026** की शुरुआत तक अपना प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाकर **77,000** यूनिट प्रति महीना करेगी।
सब्सिडी से आत्मनिर्भरता की ओर
Ather Energy ने साफ कर दिया है कि भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर अब इतना मैच्योर हो चुका है कि उसे सरकारी सपोर्ट की बैसाखी की जरूरत नहीं है। कंपनी के मुताबिक, अब मैन्युफैक्चरर्स के बिजनेस मॉडल इस तरह तैयार हो रहे हैं कि वे PM E-DRIVE जैसी सरकारी स्कीमों पर निर्भर रहे बिना भी सरवाइव कर सकते हैं। हालांकि केंद्र सरकार का सपोर्ट मार्च 2028 तक जारी रहेगा, लेकिन कंपनी अब सरकारी इंसेंटिव्स के बजाय ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर जोर दे रही है।
वेटिंग पीरियड और प्रोडक्शन का संकट
फिलहाल कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सप्लाई चेन की है। मौजूदा समय में ग्राहकों को बाइक की डिलीवरी के लिए 50 दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है। तमिलनाडु स्थित कंपनी का मौजूदा प्लांट हर महीने सिर्फ 30,000 से 35,000 यूनिट ही बना पा रहा है, जो बढ़ती रिटेल डिमांड के सामने काफी कम है। इस देरी के कारण ग्राहकों के पास अपने प्रतिद्वंदियों के पास जाने का रिस्क भी बना हुआ है।
महाराष्ट्र प्लांट से आएगी नई ताकत
इस डिमांड को पूरा करने के लिए कंपनी दिसंबर में महाराष्ट्र में अपना नया प्रोडक्शन प्लांट शुरू करने जा रही है, जो अकेले 42,000 यूनिट्स की क्षमता जोड़ेगा। इसके बाद कंपनी का कुल प्रोडक्शन 77,000 यूनिट मंथली तक पहुंच जाएगा। गौरतलब है कि अगस्त 2026 में कंपनी की सेल्स में सालाना आधार पर 50% का भारी उछाल देखा गया था और कंपनी ने 28,757 यूनिट्स बेची थीं।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या Ather Energy समय रहते अपनी प्रोडक्शन क्षमता को बढ़ाकर Ola Electric, TVS Motor और Bajaj Auto जैसे प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ पाती है या नहीं।
